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बीमारी नहीं है विश्व हकलाना दिवस, इस समस्या को दूर करने लोगों को फ्रेंड्स और फैमिली के सपोर्ट की है जरूरत

CG News: हकलाहट का कोई असल इलाज नहीं है क्योंकि हकलाना बीमारी नहीं है।

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बीमारी नहीं है विश्व हकलाना दिवस, इस समस्या को दूर करने लोगों को फ्रेंड्स और फैमिली के सपोर्ट की है जरूरत

बीमारी नहीं है विश्व हकलाना दिवस, इस समस्या को दूर करने लोगों को फ्रेंड्स और फैमिली के सपोर्ट की है जरूरत

बिलासपुर। CG News: हकलाहट का कोई असल इलाज नहीं है क्योंकि हकलाना बीमारी नहीं है। यह एक स्पीच डिसऑर्डर है, जो बोलने की गति में रुकावट के कारण होता है। यह आवाज, अक्षरों में दोहराव, बोलने में लंबा समय या झिझक के रूप में सामने आ सकता है।

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इस तकलीफ से जूझ रहे लोगों की पहचान कम उम्र में ही हो जाती है।ईएनटी एक्सपर्ट डॉ.अंकित ठकराल बताते हैं कि कम उम्र में हकलाने की समस्या बेहद नार्मल है। लेकिन एक वक्त के बाद अगर ये ठीक नहीं होता तो एक्सपर्ट्स से कंसल्ट करना चाहिए। बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों से हर साल बड़ी संख्या में इस तरह की समस्या से जूझ रहे मरीज देखने को मिलते हैं। हकलाहट की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपने अर्ली लाइफ में काफी ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए स्कूल, वर्क प्लेस और यहां तक अपने दोस्तों के बीच मजाक का विषय बनना पड़ जाता है।

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इस समस्या से जूझ रहे लोगों को अपने फ्रेंड और फैमिली के सपोर्ट की जरूरत होती है। जिससे वो कॉन्फिडेंस डेवेलप कर गुणात्मक सुधर ला सकें। इस समस्या को पूरी तरह से ठीक तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इसमें काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है।

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देसी इलाज के नाम पर प्रताडि़त न करें

डॉक्टरों के मुताबिक जो इस समस्या से ग्रसित हैं उन्हें साइकोलॉजिकल सपोर्ट देने की जरूरत है। आज ऑनलाइन तमाम तरह के ऐसे विज्ञापन देखने को मिलते हैं जो हकलाना एक हफ्ते में खत्म करने का दावा करते हैं। वहीं कई मामलो में झाडफ़ूंक और मिर्ची खिला कर इलाज के भी मामले देखने को मिलते हैं। लेकिन यह इस समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए किसी प्रताडऩा से कम नहीं है। इससे बचना होगा।

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बिहेवियरल थेरेपी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: कुछ लोगों को बिहेवियरल थेरेपी जैसे कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) या डिसेंसिटाइजेशन तकनीकों से फायदा हो सकता है और हकलाहट के कारण के रूप में एंजाइटी को कम किया जा सकता है।

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ईएनटी विशेषज्ञ, डॉ.अंकित ठकराल ने कहा-
अगर बच्चों में इस तरह की समस्या दिखती है तो पेरेंट्स को एक्सपर्ट्स से कंसल्ट करना चाहिए। परिवार के सहयोग से इस समस्या को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है। स्पीच थेरेपी का भी काफी पॉजिटिव असर मरीजों पर पड़ता है।

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