13 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

करोड़ों के घोटाले के आरोप में निलंबित अधिकारी और कर्मचारियों की बहाली शुरू

हद ये कि जिन 106 लोगों को अयोग्य करार देकर निकाल दिया गया था, उन्हें फिर नौकरी में रखने की तैयारी की जा रही है।

3 min read
Google source verification
Scam

बिलासपुर . करोड़ों रुपए के घोटालों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित अधिकारी-कर्मचारियों को फिर बहाल करने का दौर शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों को उनकी मनपसंद ब्रांचों में पदस्थ किया जा रहा है। हद ये कि जिन 106 लोगों को अयोग्य करार देकर निकाल दिया गया था, उन्हें फिर नौकरी में रखने की तैयारी की जा रही है। इससे अबकी बार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में पहले से भी बड़ा घोटाला होने की आशंका है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में 106 लोगों को उनकी योग्यता नहीं होने के बावजूद गलत तरीके से नौकरी देने के मामले में निलंबित प्रभारी अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमित शुक्ला को पुन: बहाल कर दिया गया है। शुक्ला का निलंबन वापस करने के बाद पुराने बस स्टैंड स्थित बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया है। तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक तिवारी के कार्यकाल में शुक्ला को 106 लोगों की बैंक की भर्ती और गड़बड़ी में मुख्य भूमिका पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। प्रारंभिक जांच में शुक्ला को दोषी भी पाया गया था। अभी जांच पूरी नहीं हुई है। इसी तरह शेखर दत्ता को गंभीर आर्थिक अनियमितता के आरोप पर निलंबित किया गया था, उन्हें भी बहाल कर दिया गया है। करोड़ों रुपए के परिवहन घोटाले की फाइल गायब होने के मामले में निलंबित घनश्याम तिवारी को भ्भी बहाल कर दिया गया। मल्हार में तीन करोड़ रुपए के धान घोटाले में एफआईआर व एसआईटी की जांच में फंसे टंडन को कोटा शाखा में बीएम बनाया गया है।
पदस्थापना का खेल शुरू : बैंक में अब अध्यक्ष मुन्नाराम राजवाड़े ने अपने पंसदीदा अधिकारियों, लेखापालों की पदस्थापना शुरू कर दी है। अमित दुबे जरहागांव से छपोरा में पदस्थ किए गए हैं। गिरीलाल राठौर डभरा से चांपा, रश्मि गुप्ता चांपा से मरवाही, चंद्रकुमार वर्मा बलौदा से नवागांव , सहायक लेखापाल दीपक साहू प्रधान कार्यालय से बालको, सहायक लेखापाल आशिष सोनी प्रधान कार्यालय से जमनीपाली में पदस्थ किए गए हैं।
नौकरी से निकाले गए लोगों को फिर वापस लेने की तैयारी : जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में अध्यक्ष देवेंद्र पांडेय के कार्यकाल में गलत व नियम विरूद्ध 106 लोगों की भर्ती कर ली गई थी। मामला खुला तो तत्कालीन कलेक्टर अंबलगन पी. ने उक्त सभी को बर्खास्त कर दिया था। अब उन्हीं लोगों को फिर नौकरी में रखने की तैयारी चल रही है। इसके लिए लोग बैंक के वर्तमान अध्यक्ष से संपर्क कर रहे हैं।
जांच नहीं हो सकी पूरी : जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में तत्कालीन अध्यक्ष देवेंद्र पांडेय के कार्यकाल में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए थे। इसके बाद सहकारिता मंत्री दयालदास बघेल ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच दल गठित की थी। जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी। जांच टीम वर्तमान संयुक्त संचालक सहकारी संस्थाएं केएल ढारगावे के नेतृत्व में गठित की गई थी।
सीईओ की गैरमौजूदगी में बैठक : बैंक की स्टाफ कमेटी की बैठक लेने का अधिकार सीईओ को है। जानकारों का मानना है कि प्रभारी सीईओ की गैर मौजूदगी में स्टाफ कमेटी की बैठक ली गई। इसमें सभी नीतिगत निर्णय लिए गए। बैंक में चर्चा है कि बैठक में प्रभारी सीईओ से बाद में हस्ताक्षर कराए गए।
आदेश देने में आनाकानी : बैंक प्रबंधन ने बहाली और पदस्थापना को लेकर मौखिक जानकारी दी है। वह भी अधूरी जानकारी देते हुए मौखिक तौर पर निलंबित लोगों को दोषमुक्त बताया गया। लेकिन इनकी पदस्थापना के आदेश देने से इनकार कर दिया ।
जांच जारी है, कोई दोषमुक्त नहीं हुआ : जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में आर्थिक अनियमितताओं की जांच अंतिम चरण में है। प्रथम दृष्टया जो दोषी हैं, वे अब भी हमारे रिकार्ड के मुताबिक निलंबित हैं। बैंक के प्रभारी सीईओ, अध्यक्ष व संचालक मंडल ने यदि उन्हें बहाल किया है तो हमें इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
केएल ढारगावे, संयुक्त पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, बिलासपुर
आरोप सिद्ध नहीं : जिन लोगों पर अनियमितता और गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उन पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए उन्हें बहाल कर दिया गया। उन्हें विभिन्न शाखाओं में पदस्थ किया गया है।
विकास गुरूद्वान, प्रभारी सीईओ, जेएसकेबी