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‘विकलांगों को सहज रूप में लें ताकि वे हीनता की भावना से ऊपर उठ सकें’

शोधपरक साहित्यिक पुस्तकों के माध्यम से हम समाज में विकलांगों की चेतना जागृत करने में सक्षम हुए हैं। यह उदग़ार अधिवेशन के मुख्य अभ्यागत न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ ने अपने उद्बोधन में व्यक्त की।

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Eleventh National Seminar on Disability-Discussion

Eleventh National Seminar on Disability-Discussion

बिलासपुर. शोधपरक साहित्यिक पुस्तकों के माध्यम से हम समाज में विकलांगों की चेतना जागृत करने में सक्षम हुए हैं। यह उदग़ार अधिवेशन के मुख्य अभ्यागत न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ ने अपने उद्बोधन में व्यक्त की।
न्यायमूर्ति चंद्रभूषण ने कहा कि समाज के सकलांग व्यक्ति को विकलांगों को सहज रूप में लेना चाहिए ताकि वे हीनता की भावना से ऊपर उठकर स्वयं सशक्त बन सकें।
अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए डांॅ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि परिषद् साहित्य के प्रकाश में विकलांगों में व समाज के लोगों में चेतना जगाने का काम कर रही है। आज इस मंच से दो पुस्तक डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे की 51 विकलांगपरक कविता-संग्रह डोली अरमानों की तथा दीनदयाल यादव की बीस विकलांगपरक कहानी संग्रह चिर विजय के विमोचन ने विकलांगों की सक्षमता व आत्मनिर्भरता को सही रूप में रेखांकित कर रहा है। इसके पूर्व विशिष्ट अभ्यागत डॉ. ललित कुमार (नोयडा), डॉ. विद्या केडिया, गोविन्द मिरी पूर्व सांसद, परिषद् के संरक्षक विरेंद्र पाण्डेय, महामंत्री डां मदन मोहन अग्रवाल, डीपी अग्रवाल, डॉ. सुरेश माहेश्वरी (महाराष्ट्र), सत्येंद्र अग्रवाल, डां अनुराधा दुबे (रायपुर) ने भी सभा को संबोधित किया।
द्वितीय चरण में शोध पत्र का हुआ वाचन अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् एवं प्रयास प्रकाशन बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आज से दो दिनी तेईसवां राष्ट्रीय अधिवेशन, आमसभा तथा विकलांग-विमर्श विषयक ग्यारहवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का गीतादेवी रामचंद्र अग्रवाल विकलांग अस्पताल, अनुसंधान एवं नि:शुल्क सेवा-केंद्र, मोपका के भव्य सभागार में पंजीयन के बाद अधिवेशन का उद्घाटन न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, पूर्व न्यायाधीश हाईकोर्ट छग, के आतिथ्य एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में हुआ।स्वागत उद्बोधन विद्या केडिया ने दिया, संचालन राजेन्द्र अग्रवाल तथा आभार नित्यानंद अग्रवाल ने दिया। द्वितीय चरण में विकलांग -विमर्श मानवता का उत्कर्ष विषय पर शोध पत्र का वाचन किया गया। इनमें श्रीमती आभा गुप्ता,डा बजरंगबली शर्मा, डा मनोरमा अग्रवाल, डॉ अर्चना शर्मा, डॉ प्यारेलाल आदिले, डॉ उग्रसेन कन्नौजे, संतोष कुमार शर्मा, राजेश कुमार मानस, अंजनी कुमार तिवारी प्रमुख हैं। अध्यक्ष मंडल में सर्वश्री डॉ सुरेश माहेश्वरी अमलनेर महाराष्ट्र, सम्यक ललित कुमार नोएडा दिल्ली, डॉ मीनकेतन प्रधान, रायगढ़, डॉ अनिता सिंह, उपन्यासकार बिलासपुर थे । डॉ विनय कुमार पाठक ने सभी का मार्गदर्शन किया । डॉ विश्वनाथ कश्यप ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन किया ।
ये हुए सम्मानित
शासकीय किरोड़ीमल स्नातकोत्तर कला एवं विज्ञान स्वशासी महाविद्यालय में विकलांग-विमर्श को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने हेतु डॉ. मीनकेतन प्रधान को सम्मानित किया गया। विकलांगों की सेवा में अभाविप के अहर्निश सेवारत, समर्पित कार्यकर्ताओं विद्या हरीश केडिया, संगठन मंत्री डीपी गुप्ता, राजेन्द्र अग्रवाल "राजू", राजेश अग्रवाल, शिवरीनारायण, सत्येंद्र अग्रवाल रायपुर, राजेश पाण्डेय, नित्यानंद अग्रवाल, बाल गोविंद अग्रवाल, लक्ष्मी जायसवाल, पवन नालोटिया, रोटरी ई क्लब आफ बिलासपुर यूनाइटेड, रोटरी क्लब बिलासपुर के सदस्यों, छ. ग. के विभिन्न जिलों में संचालित परिषद् के सदस्यों को उनके महत्वपूर्ण भूमिका व योगदान के लिए सम्मानित किया गया।