उत्तर भारत का सबसे बढ़े एजुकेशन हब कोनी क्षेत्र में गुरुघासीदास केन्द्रीय यूनिवर्सिटी , अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सटी, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय , शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, शासकीय आईटीआई, डीपी विप्र शिक्षा महाविद्यालय , महिला आईटीआई, समेत 3 बड़े निजी स्कूल शिक्षण संस्थान स्थित हैं। यहां प्रदेश से ही नहीं बल्कि पूरे शहर भर से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। दूर दराज से पढ़ने आने वाले विद्यार्थी यहां किराये मकान, हॉस्टल और सरकारी हॉस्टलों में रहकर पढ़ते हैं। इसकी संख्या करीब 17 हजार है। सभी विद्यार्थी अपने जरूरत के सामान कोनी मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे तोड़ी गई 80 से अधिक दुकानों से खरीदते थे। तोड़फोड़ के बाद यहां के स्थानीय नागिरक परेशान हो रहे थे, लेकिन अब शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई शुरू होने के बाद यहां विद्यार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बारिश भी जमकर हो रही है। ऐसे में यहां के लोगों और विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।
1 करोड़ का व्यापार प्रभावित
कोनी क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों का आने का सिलसिला भले ही अभी शुरू हुआ है, लेकिन यहां रहने वाले करीब 5 हजार परिवारों में से साढ़े 3 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं। इससे कोनी में करीब 1 करोड़ रुपए का व्यवसाय प्रभावित हुआ है।
एक्सपर्ट
व्यू डॉ दिलीप झा
प्राध्यापक, अर्थशास्त्र विभाग गुरू घासीदास विश्वविद्यालय
इस क्षेत्र में प्रति विद्यार्थी प्रतिदिन 500 रू खर्च करता है और परिवार 2000 से 3000 खर्च करते हैं तो 10000 की छात्र संख्या तथा लगभग 700 परिवार की क्षमता वाले इस क्षेत्र में कुल 2.5 – 3 करोड़ का व्यापार हर महीने किया जाता है। गर्मियों के मौसम में विद्यार्थी और यहां रहने वाले कुछ लोग अपने गृहग्राम चले जाते हैं, लेकिन 60 फीसदी लोग यही रहते हैं। दुकानों के टूटने के कारण 24 दिनों में 1 करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था को क्षति हुई है। अब आने वाले समय में जरूरतमंदों को जरूरत का सामान लेने में परेशानी होगी।
दो वक्त की रोटी भी छीनने में लगे हैं
कोनी आईटीआई गेट के पास होटल चलाने वाली सोनावती कुश्वाहा ने कहा कि वह पिछले 22 वर्षों से होटल चलाकर अपना और अपने पति के लिए दो वक्त की रोटी का इंतेजाम करती आ रह है दुकान तोड़कर निगम अधिकारी उनसे दो वक्त की रोटी भी छीनने में लगे हैं। होटल से शैक्षणिक संस्थानों में पहले वाले कई विद्यार्थी भी प्रभावित हो रहे हैं।
परेशानी बढ़ी
जीजीयू में एमए के छात्र सूरज सिंह ठाकुर ने कहा कि पढ़ाई से जुड़े सारे काम ऑनलाइन होने के कारण उन्हें इस काम को पूरा करने के लिए च्वाइस सेंटर जाना पड़ता था। यह कोनी क्षेत्र में आसानी से मिल जाने के कारण परेशानी नहीं होती थी, लेकिन अब दुकानें टूट जाने से परेशानी बढ़ गई है।
ऑनलाइन काम के लिए 5 किलो मीटर दूर जाना पड़ रहा
जीजीयू के छात्र हर्षित पटेल ने कहा कि यूनविर्सटी में प्रवेश और केवाइसी के काम के लिए यहां के च्वाइस सेंटरों से अब तक काम होता आया है, लेकिन दुकानें टूटने के कारण अब इसी काम को कराने के लिए 5 किलो मीटर दूर सरकंडा तक जाना पड़ रहा है।