
पूरे देश से सिमट रहे नक्सली, घटनाओं में 77 प्रतिशत की आई है कमी
बिलासपुर. जब नक्सल गतिविधि की बात होती है तो रेड कॉरिडोर यानि लाल गलियारे की बात जरूर होती है। इस कॉरिडोर में कई राज्य शामिल हैं जिसमें छत्तीसगढ़ का नाम भी प्रमुख है। पर बीते कुछ वर्षों की बात करें तो वामपंथी उग्रवाद के लाल गलियारे में शामिल राज्यों से इनकी जमीन खिसकी है यहां इनके हमले की संख्या भी कम होती जा रही है और लोगों की मौत भी कम हो रही है। केवल छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्य है जो इनका ठौर भी बना हुआ है और ये घटनाओं को अंजाम भी दे रहे हैं। यहां तक की कोरोना काल में भी जब पूरी मानवता चित्कार रही थी फिर भी ये थमे नहीं।
बीते कुछ वर्षों की बात करें तो देश में वामपंथी उग्रवाद संबंधी हिंसा की घटनाओं में 77 प्रतिशत तक की कमी आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2009 में पूरे देश में सबसे ज्यादा वामपंथी उग्रवाद की हिंसक घटनाएं दर्ज की गई थीं जो कि 2258 थीं। लेकिन वर्ष 2021 तक ये घटनाएं केवल 509 रह गईं हैं। वहीं मौत के आंकड़े में भी कमी आई है जिसमें आम आदमी और सुरक्षाबल दोनों शामिल हैं। वर्ष 2010 में सबसे ज्यादा 1005 लोगों की मौत हुई थी जिसे परिणामी मौत कहा जाता है, जबकि वर्ष 2021 में ये घटकर 147 हो गई है।
रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो वर्षों में वामपंथी उग्रवाद की हिंसक घटनाओं और परिणामी मौत में 24 और 27 प्रतिशत की कमी आई है।
सिर्फ छत्तीसगढ़ में हमले भी बढ़े और मौत भी
केंद्रीय गृह मंत्रालय के डेटा के अनुसार केवल छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्या है जहां पिछले तीन वर्ष यानि 2019 से 2021 की बात करें तो नक्सली घटनाएं भी अधिक हुई है और मौत के आंकड़े भी बढ़े हैं। इन तीन वर्षों में नक्सलियों ने 833 वारदातों को अंजाम दिया है, जिसमें 289 मौत दर्ज हुई है यह बीते तीन वर्षों में पूरे देश में सर्वाधिक है।
झारखंड दूसरे नंबर पर लेकिन घट रहे मामले
नक्सल प्रभावित राज्यों में वारदातों की लिस्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ के बाद झारखंड दूसरे नंबर पर है जहां वारदात तो हो रहे हैं पर साल-दर-साल हमले और मौत की संख्या कम हो रही है। 2019 में 200 घटना हुई 54 मौत दर्ज की गई। 2020 में 199 घटना हुई 39 मौत दर्ज की गई जबकि 2021 में 130 घटना हुई और 26 मौत दर्ज की गई।
पश्चिम बंगाल में आंकड़े शून्य
इस रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात यह भी है कि पश्चिम बंगाल जहां से नक्सल आंदोलन की शुरुआत हुई थी वहां वर्ष 2019 से वर्ष 2021 तक वामपंथी उग्रवाद के हमले और मौत का आंकड़ा शून्य है। उत्तरप्रदेश में भी यही स्थिति है। केरल में पांच घटनाएं हुईं पर मौत का आंकड़ा शून्य है। तेलंगाना में 28 घटनाएं हुईं और मौत की संख्या चार है। वहीं मध्यप्रदेश में 40 घटनाएं हुईं और मौत की संख्या सात है।
कहां कितनी नक्सल घटनाएं
राज्य 2019 2020 2021
आंध्र प्रदेश 18 12 11
बिहार 62 26 26
छत्तीसगढ़ 263 315 255
झारखंड 200 199 130
महाराष्ट्र 66 30 31
ओडिशा 45 50 32
किस राज्य में कितनी मौत
राज्य 2019 2020 2021
आंध्र प्रदेश 05 04 01
बिहार 17 08 07
छत्तीसगढ़ 77 111 101
झारखंड 54 39 26
महाराष्ट्र 34 08 06
ओडिशा 11 09 03
कमजोर हुए हैं नक्सली, हमारी पहुंच उनके कोर एरिया तक
प्रदेश में भी नक्सल वारदातों में कमी आई है। नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र कम हो रहा है। उनके जो कोर एरिया थे वहां तक पुलिस और फोर्स की पहुंच बनी है। नए-नए कैंप खोले गए हैं इससे उनकी पकड़ कमजोर हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो यूथ है उसका पुलिस और सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। विकास के कार्य हो रहे हैं।
विवेकानंद सिन्हा, एडीजी, नक्सल ऑपरेशन
Published on:
14 Jul 2022 10:45 pm
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