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यह छत्तीसगढ़ का पहला जिला होगा जिसका नाम 3 शहरों के नाम पर रखा गया है, जाने कब से बैठेंगे यहां कलेक्टर

Chhattisgarh: 15 अगस्त को घोषणा, 20 सितंबर को अधिसूचना, सबकुछ ठीक रहा तो जनवरी 20 से बैठेंगे कलेक्टर

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 district of Chhattisgarh

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बिलासपुर. नए जिले गोरैला-पेंड्रा-मरवाही को लेकर राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसका अर्थ यह है कि अब इस जिले का अस्तित्व कागजों में आ गया है। 60 दिन दावा आपत्ति के लिए समय दिया गया है। ऐसे में कहा यह जा रहा है कि यदि सबकुछ ठीक ठाक रहा तो नए साल या जनवरी 2020 से नए जिले में कलेक्टर बैठ जाएंगे, फिर सारा कार्य वहीं से नियंत्रित होगा।
विदित हो कि 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस नए जिले की घोषणा की थी। इसके बाद इस दिशा में प्रशासनिक महकमे ने कार्य आरंभ कर दिया था। जिले के भौगोलिक स्थिति के गठन से लेकर तहसीलों व नए जिले में शामिल होने वाले ग्राम पंचायतों व गांवों का खाका तैयार करने का काम किया जा रहा था।

जब ये तैयारी पूरी हुई तो 20 सितंबर को राज्य शासन ने नए जिले के गठन को लेकर अधिसूचना जारी करते हुए राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही नए जिलेवासियों को दावा-आपत्ति के साथ ही सुझाव के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। सुझावों और शिकायतों के निराकरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दावा आपत्ति व सुझावों को सीधे राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग भेजने कहा गया है। आला अफसरों की अगुवाई में सुझाव पर अमल करने चर्चा होगी व दावा आपत्तियों का निराकरण भी करेंगे । अधिकारियों का कहना है कि जिस गति से कार्य चल रहा है यदि बीच में कोई दिक्कत नहीं हुई तो अगले साल जनवरी तक ये जिला पूर्ण रूप से फंक्शन में आ जाएगा।
बढ़ा निगम का दायरा, जिल हुआ छोटा
नगरीय निकाय चुनाव के पहले सरकार ने नगर निगम की सीमा बढ़ा दी है, इसमें दो नगर पंचयत एक नगर पालिका के अलावा 15 गांव को शामिल किया गया है जिससे बिलासपुर शहर की आबादी दो गुनी हो गई है। वहीं गौरेला,पेन्ड्रा मरवाही को बिलासपुर से अलग कर नया जिला बनाया गया है। इससे पहले मुंगेली को भी बिलासपुर से अलग कर नया जिला बनाया गया।

शासन की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। साठ दिन दावा आपत्ति के लिए दिया गया है। इसके बाद रायपुर से इसका निराकरण होगा। इसके बाद आगे का कार्य होगा।
डिगेश पटेल, एसडीएम, पेंड्रा रोड

इससे बिलासपुर जिला काफी छोटा हो गया है। नए जिला बनने से स्थानीय लोग नफा नुकसान के बारे में विचार कर रहे हैं वहीं नए जिला बनने से मरवाही, गौरेला ,पेन्ड्रा के लोगो अनेक परेशानियों से निजात मिलेगी । उनको छोटे छोटे कार्य के लिए अब मरवाही से दो सौ किलो मीटर बिलासपुर आकर चक्कर नहीं काटना पड़ेगा।

नए जिला बनने से काम वहीं हो जाएगा। अगर इसे राजनैतिक दृष्टि से देखा जाए तो जोगी को बिलासपुर जिले से बाहर कर दिया गया है। अब उस परिवार का इस जिले में ज्यादा हस्पक्षेप नहीं रहेगा। उनकी राजनीति को मरवाही जिले तक समेटकर रख दिया गया है। नए जिले में पसान के 42 गांव को नहीं जोड़ा गया है। लेकिन प्रशासनिक अफसरों का कहना है जो दावा आपत्ति के लिए समय दिया गया है इसमें आवेदन करने पर उसे शामिल किया जा सकता है।


राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही नए जिले में राजनीतिक सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। नए जिले के नक्शे में गौरेला,पेंड्रा व मरवाही ब्लॉक के अलावा आसपास के क्षेत्रों को शामिल कराने सत्ताधारी दल के दिग्गजों की सक्रियता भी बढऩे लगी है। नए जिले के अस्तित्व में आते ही एक और विधानसभा बिलासपुर जिले के नक्शे से कट जाएगा ।

वर्ष 1998 के पहले के नक्शे पर नजर डालें तो अविभाजित बिलासपुर जिले का विशाल क्षेत्रफल रहा है। यहां कोयले सहित खनिज संपदा की प्रचुरता का भंडार भी था। राजस्व के मामले में अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में बिलासपुर जिले का अलग नाम चलता था। तय तिथि के बाद प्रदेश के 28 वें जिले के रूप में गौरेला-पेंड्रा -मरवाही जिला अस्तित्व में आ जाएगा।