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सिम्स में कोई नहीं बनना चाहता अधीक्षक, परेशान होकर दो डॉक्टर छोड़ चुके हैं नौकरी

मूर्ति को पसंद नहीं कुर्सी

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CIMS

सिम्स में कोई नहीं बनना चाहता अधीक्षक, परेशान होकर दो डॉक्टर छोड़ चुके हैं नौकरी

बिलासपुर. सिम्स में फैली अव्यवस्था, डॉक्टरों के बीच राजनीति और स्टाफ की मनमानी के कारण सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति ने अधीक्षक पद से हटने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने डेढ़ महीने पहले डीन के समक्ष अपनी बात रख दी। डीन ने उनका पत्र डीएमई को भेज दिया, लेकिन अभी तक कुछ निर्णय नहीं हो सका है। दरअसल सिम्स में चल रही खींचतान के कारण यहां के कोई भी डॉक्टर अधीक्षक पद का चार्ज लेने के लिए तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि डीएमई द्वारा किसी डॉक्टर के नाम पर आदेश जारी किया जा सकता है। या फिर किसी अन्य डॉक्टर को अधीक्षक बनाकर दूसरी जगह से यहां पदस्थ किया सकता है। सिम्स हॉस्पिटल में लंबे समय से आपसी खींचतान चल रही है। एक-दूसरे की टांग खिंचाई और राजनीति के चलते हर कोई परेशान है। इसका असर यहां की व्यवस्था पर भी पड़ रहा। मरीजों का इलाज भी इससे प्रभावित हो रहा है। इस माहौल से तकरीबन हर विभाग में ऐसे लोग खासे परेशान हैं, जो गंभीरता से अपना काम करना चाहते हैं। यहां की राजनीति ऐसी कि खुद डॉक्टर ही डॉक्टर को परेशान कर रहे। जो यहां जमे रहना चाहते हैं, वे अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके काम करने वाले डॉक्टरों का तबादला करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे। जिनका तबादला नहीं करवा पा रहे उन्हें दूसरे तरीके से परेशान कर रहे। इसी का नतीजा रहा, कि पिछले 5 वर्षों में यहां सर्जरी, विभाग से चार ऐसे डॉक्टर चले गए जो अपने काम के चलते बेहद लोकप्रिय थे। उस समय सिम्स का सर्जरी विभाग काफी सशक्त माना जाता था। प्रारंभिक काल से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सिम्स को संभालने में उन डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही, जो अब यहां नहीं रहे। जो बचे हैं, वे इतने परेशान कि कभी भी अलविदा कह सकते हैं। इन्हीं सब कारणों को लेकर वर्तमान अधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति भी खासे परेशान हैं। उन्होंने डेढ़ महीने पहले डीन को पत्र लिखकर सिम्स के अस्पताल अधीक्षक के पद से मुक्त करने की मांग की थी। डीन डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा ने उनका पत्र डीएमई अशोक चंद्राकर को भेज दिया है। बताया जाता है डॉ. मूर्ति की जगह पर एमएस बनने के लिए सिम्स का कोई भी डॉक्टर तैयार नहीं हो रहा। खबर है कि एक-दो डॉक्टर ये इच्छा तो रखते हैं, लेकिन वे खुलकर सामने नहीं आना चाह रहे। इसलिए अब डीएमई ही आदेश जारी कर अधीक्षक की नियुक्ति कर सकते हैं।

परेशान होकर दो डॉक्टर छोड़ चुके हैं नौकरी
दो डॉक्टरों ने तो राजनीति और सरकारी व्यवस्था से परेशान होकर नौकरी ही छोड़ दी। इधर मेडिसिन विभाग में भी अस्थिरता का दौर चल रहा है। यहां एक सीनियर डॉक्टर का तो दो बार तबादला किया जा चुका है। परेशान होकर अब वे भी सरकारी व्यवस्था से अलग होने का मन बना रहे हैं। सिम्स के आर्थोपेडिक विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर भी इसी राजनीति और साजिश का शिकार हो गए। उनका तबादला अंबिकापुर कर दिया गया। गायनिक विभाग की ऐसी राजनीतिक षडय़ंत्र से अछूता नहीं रहा। इस विभाग के डॉक्टर भी इससे प्रताडि़त हुए। इन सबका खामियाजा अंतत: मरीजों को ही भुगतना पड़ रहा है।

मामला शासन स्तर पर
मैंने घरेलू परेशानियों के चलते अपना पद छोडऩे के लिए डेढ़ महीने पहले डीन को पत्र दिया था। यह मामला शासन स्तर पर लंबित है।
डॉ. रमणेश मूर्ति, अधीक्षक सिम्स
शासन को भेज दिया

डॉ. मूर्ति ने पत्र दिया था। उसे मैंने शासन को भेज दिया है। इस मामले में निर्णय शासन को
लेना है।
डॉ. पीके पात्रा, डीन सिम्स