
बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश (photo source- Patrika)
CG Crime: शहर में लगातार बढ़ रही बाइक चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) ने एक अंतरजिला बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से चोरी की छह मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं, वहीं चोरी की गाड़ियां खरीदने वाले तीन लोगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड महज 19 साल का युवक निकला।
शहर में लगातार बढ़ती बाइक चोरी की वारदातों को देखते हुए एसएसपी Rajnesh Singh ने ACCU टीम को विशेष जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद टीम ने व्यवस्थित तरीके से जांच शुरू की। शहर के अलग-अलग इलाकों से करीब 300 CCTV फुटेज खंगाले गए। संदिग्धों की गतिविधियों का रूट चार्ट तैयार किया गया। तकनीकी और मैनुअल इनपुट के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। जांच के दौरान मस्तूरी क्षेत्र के वेद वेदपरसदा गांव में मुख्य आरोपी साहिल मरावी के होने की जानकारी मिली। पुलिस ने तुरंत दबिश देकर उसे हिरासत में लिया।
शुरुआत में आरोपी साहिल पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने गिरोह की पूरी कहानी उजागर कर दी। उसने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर अलग-अलग जिलों में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्य—निलेश शुक्ला, हिमांशु जगत और रायपुर निवासी रितेश सेन—को भी गिरफ्तार किया।
एएसपी पंकज पटेल के मुताबिक, यह गिरोह बिलासपुर, दुर्ग और जांजगीर जिलों में सक्रिय था। बिलासपुर के सरकंडा, सिविल लाइन और कोतवाली क्षेत्र से 4 बाइक चोरी हुई। दुर्ग के मोहन नगर क्षेत्र से 1 बाइक तो जांजगीर जिले से 1 बाइक चोरी की गई।
पुलिस ने कुल छह मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिनकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये बताई जा रही है।
गिरोह चोरी की बाइक को गांवों में कम कीमत पर बेच देता था। 20 से 25 हजार रुपये में बिना कागजात के बाइक बेची जाती थी। खरीदारों को सस्ती डील का लालच दिया जाता था। पुलिस ने बाइक खरीदने वाले रघुनंदन साहू, नंदकुमार रजक और सोनू केंवट को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि चोरी का सामान खरीदना भी अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
पिछले कुछ समय में शहरों और कस्बों में बाइक चोरी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके पीछे कई कारण माने जाते हैं-
पार्किंग में लापरवाही और सुरक्षा का अभाव
युवाओं का संगठित गिरोह बनाकर अपराध की ओर झुकाव
चोरी के वाहनों की आसान खपत (रिसेल मार्केट)
तकनीकी निगरानी के बावजूद अपराधियों के नए तरीके
Updated on:
27 Mar 2026, 3:29 PM IST
Published on:
27 Mar 2026, 3:29 PM IST
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