
Bilaspur Hindi news: पत्रिका की पहल पर आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स में महिलाएं अब बिना गायनेकोलाजिस्ट से परामर्श लिए बेझिझक सीधे सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए ‘पेप स्मियर’ टेस्ट करा सकती हैं। इसके लिए उन्हें ओपीडी स्लिप के साथ सेंट्रल लैब स्थिति साइटोलॉजी यूनिट में जाना होगा। यहां रिपोर्ट मिलने के साथ ही उचित सलाह भी दी जाएगी।
प्रिवेंटेबल है बीमारी
सर्वाइकल कैंसर के कई कारण हो सकते हैं जिसमें शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान न देना, जल्दी विवाह, एक से अधिक सेक्स पार्टनर रिलेशनशिप, नशाखोरी, गुप्तांग में इन्फेक्शन, कमजोर इंम्युनिटी, फैमिली हिस्ट्री प्रमुख कारण हैं। विडंबना ये है कि यह बीमारी प्रिवेंटेबल है। यानी उक्त कारणों को ध्यान में रख सतर्कता बरतने से इस बीमारी से बचा जा सकता है, इसके बावजूद इसके मरीजों की संख्या व मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह जागरुकता में कमी भी मानी जा सकती है। लिहाजा इसे लेकर पूरी सावधानी बरतनी जरूरी है
सिम्स में हर रोज औसतन पहुंच रहीं 10 मरीज
महिलाओं में तेजी से सर्वाइकल कैंसर का ग्राफ बढ़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक विश्व में मुख, गला व ब्रेस्ट के बाद सबसे ज्यादा कैंसर मरीजों की संख्या इसी की है। राज्य भर में सवा लाख से ज्यादा इससे पीड़ित हैं। जबकि आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स की बात करें तो यहां हर रोज औसतन इसके 10 नए मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
गायनेकोलॅाजिस्ट के परामर्श की नहीं जरूरत
इंटर्नल पार्ट की जांच को लेकर होने वाली झिझक को देखते हुए पत्रिका की पहल पर महिलाओं के लिए सीधे जांच की व्यवस्था बनाई गई है। अभी तक बीमारी के उक्त लक्षणों पर गायनेकोलाजिस्ट यानी स्त्रीरोग विशेषज्ञ जब प्रिस्क्राइब करते थे, तभी ‘पेप स्मियर’ जांच होती थी। अब बिना स्त्रीरोग विशेषज्ञ की सलाह के सीधे महिलाएं सिम्स के सेंटल लैब स्थिति साइटोलॉजी यूनिट में जांच करा सकती हैं। यहां महिला डॉक्टर ही पूरी जांच करेंगी। रिपोर्ट के आधार उचित परामर्श देते हुए महिलाओं को इस संबंध में जागरूक भी किया जाएगा।
खबर का असर
तेजी से बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए तो चिंता का विषय है ही, स्वास्थ्य विभाग के साथ ही केंद्र सरकार भी सकते में हैं। यही वजह है कि अंतरिम बजट में इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन शुरू करने कहा गया है। हालांकि अभी इसकी तैयारी शुरू नहीं हुई है, पर सिम्स में इसे लेकर अभी से मुस्तैदी शुरू हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के बच्चेदानी के मुख का कैंसर होता है। इंटरनल पार्ट में बार-बार इंफेक्शन, मासिक स्राव में बदलाव, सेक्स के दौरान दर्द का अहसास व ब्लीडिंग इसके प्रमुख लक्षण हैं। इन लक्षणों के आधार पर सतर्कता बतौर महिलाएं सीधे सिम्स के साइटोलाजी यूनिट में जाकर जांच करा सकती हैं।
महिलाओं को जांच के लिए लंबी कतार में न लगना पड़े, कोई झिझक न हो, इसके लिए नई पहल की जा रही है। ओपीडी स्लिप कटाने के बाद महिलाएं सीधे सेंट्रल लैब स्थित साइटोलॉजी यूनिट आकर पेप स्मियर जांच करा सकती हैं। यहां उन्हें इस बीमारी के बचाव के लिए जागरूक करने के साथ ही उचित परामर्श भी दिया जाएगा। जांच के लिए विशेष रूप से यूनिट में महिला डॉक्टर रहेंगी।
डॉ. बीपी सिंह, डायरेक्टर प्रोफेसर एंड एचओडी डिपार्टमेंट आफ पैथोलॉजी सिम्स
Published on:
08 Feb 2024 03:34 pm
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