
देश के कई जू में दहाड़ रहे बिलासपुर के पैदाइशी शेर, उधर अचानकमार में अचानक भी नहीं दिखा बाघ
सतीश यादव
बिलासपुर पत्रिका. देश में विश्व में बाघों की घटती संख्या चिंता का विषय है, इससे निपटने के लिए कई विधियों पर कार्य चल रहा है। इसके उलट प्रदेश का कानन पेंडारी एक मात्र ऐसा अभयारण्य है जहां इस लुप्त होती प्रजाति को न सिर्फ संरक्षण मिला है बल्कि इसकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। शुरुआत में दो बाघ(Tiger)लगभग 20 साल पहले लाए गए थे। इसके बाद ग्वालियर से दो बाघ फिर लाए गए। अब तक इनकी संख्या 40 हो चुकी है। जिसमें 26 कानन (world Tiger day 2019) में ही हैं वहीं 14 बाघों को देश के अन्य जू में भेजा गया है।
कानन पेंडारी(kanan pendari) के बाघ दूसरे जू की रौनक बढ़ा रहे हैं। पिछले 12 साल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां पैदा हुए 14 बाघों को दूसरे राज्य में भेजा गया। जो बाघों का कुनबा बढ़ाने का काम कर रहे हैं। प्रदेश के तीनों जू में सबसे अच्छा कानन पेंडारी के जू को माना गया है। वर्तमान में यहां तीन प्रजातियों के बाघ हैं इसके अलावा तेंदुआ भी काफी संख्या में हैं। कानन पेंडारी जू(kanan pendary zoo)की प्रकृति और वातावरण काफी खूबसूरत है। इसका एरिया काफी लंबी चौड़ी है। यहां का वातावरण वन्य प्राणियों के लिए अनुकूल है। इस जगह को पर्यटक भी काफी पसंद करते हैं। प्रदेश के तीनों जू से सबसे ज्यादा अच्छा कानन पेंडारी को वन विभाग के अफसर भी मानते हैं। यहां जन्मे 14 बाघ को दूसरे प्रांत भेजा गया है वे वहां भी कुनबा बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यहां से पटना जू, जूनागढ, जय़पुर, ग्वालियर, इंदौर और रायपुर के टाइगर सफारी के लिए बाघों को भेजा जा चुका है। वहीं 26 बाघ अभी भी कानन पेंडारी में है। इसके अलावा 6 तेंदुआ पल रहे हैं। इन सबके अलावा काला हिरण, मोर भी अधिक मात्रा में है। बारहसिंहा के अलावा विदेशी पक्षी ईमू भी है। कानन पेंडारी प्रबंधन द्वारा वन्य प्राणियों की अच्छी देखभाल की जाती है। जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है।
कानन में लगती है भीड़
कानन पेंडारी शहर से महज 9 किलो मीटर की दूरी पर है। शहर के पास होने के कारण लोग छुट्टी के दिन कानन पेंडारी पिकनिक मनाने के लिए आते है। इसके अलावा हर रविवार और 15 अगस्त व 26 जनवरी 31 व 1 जनवरी को यहां पैर रखने की जगह नहीं मिलती है।
हर माह 25 लाख रुपए होते हैं खर्च
पेंडारी में पल रहे 26 बाघों के देखरेख के लिए हर माह लगभग 25 लाख रुपए का बजट है। इसमें इनके भोजन से लेकर रहवास सहित अन्य सुविधाएं शामिल हैं। प्रबंधन ने बताया कि इन बाघों के पाचन शक्ति को ठीक रखने के लिए सप्ताह में एक दिन डायटिंग करवाई जाती है। ताकि इनका हाजमा दुरुस्त रहे। ाए
अब बाहर का मांस नहीं देते इन बाघों को
कानन पेंडारी के वन्य प्राणियों को बाहर से कटा हुआ मांस नहीं दिया जाता है। शेर ,बाघ व तेंदुआ के लिए बकरा आता है। इसके अलावा मुर्गी चूजा व साबूत मछली लाई जाती है। इसके लिए अलग से स्लाटर हाउस बनाया गया है जिसमें बकरा और मुर्गी को काटते हैं। मांस को कानन पेंडारी के वन्य प्राणी के डाक्टर पीके चंदन द्वारा जांच किया जाता है इसके बाद ही वन्य प्राणियों को परोसा जाता है। इसके बचे मांस को कहीं भी नहीं फेंका जाता है इसे ईंट का बनाए गए इनसीनेटर में जला दिया जाता है इससे गंदगी नहीं रहती है।
विदेशी पर्यटक भी पहुंचे थे
कानन पेंडारी जू (world tiger day 2019)की प्रसिद्धि विदेशों तक पहुंच गई है। कानन पेंडारी में रशियन पर्यटकों भी आ चुके हैं। रशिया के चार पर्यटक जू चार घंटे गुजरे विदेशी पर्यटकों में दो युवक, एक युवती और बुजुर्ग महिला थी। चारों बाघ, तेंदुआ, हिरण और मछली के अलावा सांपों को देखा हाथी के बच्चे के साथ फोटो खींचवाए। इससे पहले भी विदेश से अनेक पर्यटक आ चुके हैं।
Published on:
29 Jul 2019 11:22 am

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