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क्युटिकॉन 2022: शहर में जुटे देश भर से जाने-माने चर्म रोग विशेषज्ञ, चिंता: युवाओ में तेजी से बढ़ रहा चर्म रोग, घरेलू नुस्खे बस कामचलाऊ

- ऑटो इम्यून डिजीज की चपेट में आ रहे युवा- नई तकनीक और ट्रीटमेंट दोनों उपलब्ध

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 चिंता: युवाओ में तेजी से बढ़ रहा चर्म रोग, घरेलू नुस्खे बस कामचलाऊ

शनिवार को आईऐडीवीएल की टीम के द्वार आयोजित इस कार्यक्रम में देश प्रदेश के 125 डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में आईऐडीवीएल अध्यक्ष रश्मि सरकार, छत्तीसगढ़ राज्य डर्मेटोलॉजिस्ट अध्यक्ष आलोक सुल्तानिया, दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डर्मेटोलॉजिस्ट विभागाध्यक्ष के प्रमुख डॉ. कौशल वर्मा और मुख्या अतिथि के रूप में आईजी बी एन मीणा शामिल हुए।

बिलासपुर. आज की जनरेशन यानि युवाओं में चर्म रोग वो भी ऑटो इम्यून यानि स्वप्रतिरक्षित रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। आज हमारे क्लिीनिक में आने वाले मरीजों में अधिकांश मरीज खासकर युवा इससे पीडि़त हैं। घरेलू नुस्खे इन बीमारियों के लिए कामचलाऊ होते हैं बशर्ते उनका उपयोग परहेज के साथ किया जाए। ये बातें शनिवार को चर्म रोग विशेषज्ञों की कांफ्रेंस क्युटिकॉन २०२२ में उपस्थित चिकित्सकों ने अपने संबोधन में कही। दो दिनों तक चलने वाले इस कांफ्रेंस में प्रदेश के जाने माने चर्म रोग विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। रविवार को त्वचा की नई बीमारियों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।


क्या है ऑटो इम्यून डिजीज
विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटो इम्यून यानि स्वप्रतिरक्षित रोग वे रोग कहलाते हैं जिनके होने पर किसी जीव की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही ऊतकों या शरीर में उपस्थित अन्य पदार्थों को रोगजनक समझने की गलती कर बैठती है और उन्हें समाप्त करने के लिये उन पर हमला कर देती है।


क्या है इनके लक्षण
इस रोग के लक्षण शारीर पर चकते पडऩा, फफोले निकलना, घाव होना, थकान लगना और पपड़ीदार धब्बे बनना आदि इनके लक्षण हैं।


नए व कारगर इलाज
चर्म रोग विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में कहा कि सोरायसिस, सफेद दाग, लाइकेन स्क्लेरोसस जैसी कई घातक त्वचा संबंधी बीमारियों का कारण ऑटोइम्यून डिजीज है। अब राहत की बात है कि इनके इलाज के लिए नई पद्धति आ चुकी है। जैसे टोफासितनिब गोलियंा और बयोलॉजिक्स जैसे रेमिकेड और रेटोक्सिमैब आदि अब उपलब्ध हैं। इसमें बयोलॉजिक्स एक आधुनिक दवाई है इसमें एक्टिव जीवाणु मौजूद होते हैं ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बदलती हैं और रोग के भड़काऊ प्रभावों को नियंत्रित करती है।


125 चिकित्सक हो रहे शामिल
शनिवार को आईऐडीवीएल की टीम के द्वार आयोजित इस कार्यक्रम में देश प्रदेश के 125 डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में आईऐडीवीएल अध्यक्ष रश्मि सरकार, छत्तीसगढ़ राज्य डर्मेटोलॉजिस्ट अध्यक्ष आलोक सुल्तानिया, दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डर्मेटोलॉजिस्ट विभागाध्यक्ष के प्रमुख डॉ. कौशल वर्मा और मुख्या अतिथि के रूप में आईजी बी एन मीणा शामिल हुए।

सीधी बात,
छत्तीसगढ़ राज्य डर्मेटोलॉजिस्ट अध्यक्ष आलोक सुल्तानिया

प्रश्न: युवाओं में सबसे ज्यादा क्या परेशानी
उत्तर: अधिकांश युवा स्किन रोग से पीडि़त हो रहे हैं। वहीं नशे के कारण युवाओं में एजिंग की समस्या आ रही है।
प्रश्न: चर्म रोग में घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल ज्यादा होता है, भरोसा भी लोगों को है

उत्तर: घरेलु उपचार में इस्तमाल होने वाले नुस्खे भी अच्छे हैं मगर उनका उपयोग परहेज के साथ होना चाहिए। स्किन में जलन या और किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर उस नुस्खे का उपयोग न करें।


प्रश्न: त्वचा रोग से जुड़ी दवाइयां (बयोलॉजिक्स ) इतनी महंगी क्यों ?
उत्तर: कुछ समय पहले तक हम इन दवाओं का आयात विदेशों से करते थे इसलिए ये महंगी थीं, पर हाल में ये दवाइया सस्ती होती जा रही हैं।