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जांघों की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं ये योगासन, जानें इनके बारे में

कूल्हों में लगी कोई चोट या खिंचाव के कारण भी यह दर्द होता है। कुछ योगासन ऐसे हैं जिन्हें नियमित कर जांघों के दर्द से राहत पाई जा सकती है।

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Vikas Gupta

Oct 03, 2017

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कूल्हों में लगी कोई चोट या खिंचाव के कारण भी यह दर्द होता है। कुछ योगासन ऐसे हैं जिन्हें नियमित कर जांघों के दर्द से राहत पाई जा सकती है।

पार्श्वोत्तानासन
लंबे समय तक चलने या बैठे रहने से पैरों में खासकर जांघों में दर्द होने लगता है। कूल्हों में लगी कोई चोट या खिंचाव के कारण भी यह दर्द होता है। कुछ योगासन ऐसे हैं जिन्हें नियमित कर जांघों के दर्द से राहत पाई जा सकती है। जानें इनके बारे में विस्तार से...

ऐसे करें: ताड़ासन की मुद्रा में खड़े होकर हाथों को पीठ के पीछे लाकर हथेलियों से नमस्कार मुद्रा बनाएं। पैरों के बीच ३ फुट का गैप दें। फिर शरीर को पहले दाईं ओर घुमाएं। सांस अंदर लेते हुए कमर से ऊपर का शरीर नीचे झुकाएं। इस दौरान ठुड्डी को घुटने पर लगाएं। घुटना मोड़े नहीं। ध्यान रहे कि बाएं पैर का पंजा जमीन पर टिका रहे। कुछ देर इस अवस्था में रुककर प्रारंभिक स्थिति में आएं। बाएं पैर से भी दोहराएं।

इसे करने से खासकर शरीर का ऊपरी भाग मजबूत होता है। लेकिन इस भाग के झुकाव से निचले भाग में खिंचाव होता है जिससे जांघों की मांसपेशियों में ताकत आती है।
ध्यान रखें : पीठ या हाथों में कोई चोट लगी हो तो इसे न करें।

टिट्टिभासन
ऐसे करें : सीधे खड़े होकर आगे की ओर झुकते हुए जमीन पर हथेलियां रखें। पंजों के बीच गैप दें। अब कोहनी व कंधों के बीच के भाग को पैरों के बीच ऐसे लाएं कि जांघें इस भाग से स्पर्श हों। हाथों को मजबूती से जमीन पर टिकाएं। फिर हाथ के इस भाग पर जांघ टिकाएं। पंजों को सामने की ओर लाएं। अब सामान्य स्थिति में आ जाएं।
ध्यान रखें: कोहनी या कंधे से जुड़ा हाल ही कोई ऑपरेशन हुआ हो तो इस अभ्यास को न करें।

स्कंदासन
इसे हाफ स्क्वैट पोज या साइड लंज भी कहते हैं। जांघों को मजबूती देने के साथ यह आसन कूल्हों-पंजों की ताकत बढ़ाता है। अधिक वजन वाले ऐसे व्यक्ति जिनकी जांघों वाले भाग में अधिक चर्बी हो, वे इसका अभ्यास कर सकते हैं। घर या जिम में भी इसे कर सकते हैं।
ऐसे करें : दोनों पैरों के बीच 2-3 फुट का गैप देकर सीधे खड़े हो जाएं। अब घुटने मोड़ते हुए कुर्सी के आकार में बैठें। अब पहले बाएं घुटने को मोड़कर इस पैर के पंजे पर बैठें। इस दौरान दायां पैर दाईं ओर सीधा रहेगा। इसके बाद दाएं पैर से भी ऐसा ही करें। इस दौरान यदि संतुलन बिगड़े तो हथेलियों को जमीन पर टिकाएं या हथेलियों की नमस्कार मुद्रा बना सकते है।
ध्यान रखें : जिनके पैरों से जुड़ी कोई सर्जरी हुई है तो वे इसे न करें।