
Cancer Risk (photo- patrika)
Cancer Risk: आमतौर पर लोग इबुप्रोफेन का इस्तेमाल सिरदर्द, शरीर दर्द, पीरियड्स के दर्द या बुखार में करते हैं। लेकिन अब नई रिसर्च में यह बात सामने आ रही है कि यह आम पेनकिलर सिर्फ दर्द ही नहीं, बल्कि कुछ तरह के कैंसर के खतरे को कम करने में भी मददगार हो सकता है। हालांकि डॉक्टर साफ कहते हैं कि इसे कैंसर से बचाव की दवा मानकर खुद से लेना सही नहीं है।
इबुप्रोफेन एक NSAID (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग) है। इसका काम शरीर में सूजन और दर्द को कम करना होता है। दरअसल, शरीर में लंबे समय तक बनी सूजन कई बीमारियों, खासकर कैंसर, की जड़ मानी जाती है। सूजन से कैंसर सेल्स को बढ़ने का मौका मिलता है। इबुप्रोफेन शरीर में COX नाम के एंजाइम को रोकता है, जो सूजन बढ़ाने में मदद करता है। इसी वजह से वैज्ञानिकों को लग रहा है कि यह दवा कैंसर सेल्स की ग्रोथ को भी धीमा कर सकती है।
2025 में हुई एक स्टडी में पाया गया कि जो महिलाएं नियमित रूप से इबुप्रोफेन लेती थीं, उनमें एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय की परत का कैंसर) का खतरा कम देखा गया। यह कैंसर आमतौर पर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में होता है। रिसर्च में 55 से 74 साल की 42,000 से ज्यादा महिलाओं के डेटा को 12 साल तक देखा गया। जिन महिलाओं ने महीने में 30 या उससे ज्यादा इबुप्रोफेन की गोलियां ली थीं, उनमें कैंसर का खतरा लगभग 25% कम पाया गया।
कुछ स्टडीज के अनुसार, इबुप्रोफेन का असर सिर्फ गर्भाशय के कैंसर तक सीमित नहीं है। इसे आंत, स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने से भी जोड़ा गया है। जिन लोगों को पहले आंत का कैंसर हो चुका था, उनमें इबुप्रोफेन लेने से दोबारा कैंसर होने का खतरा कम देखा गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दवा कुछ ऐसे जीन को भी कमजोर करती है, जिनकी मदद से कैंसर सेल्स जिंदा रहते हैं और इलाज का सामना करते हैं।
यहां एक बड़ी चेतावनी भी है। सभी रिसर्च एक जैसी बात नहीं कहतीं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक NSAIDs लेने से कुछ कैंसर में मृत्यु का खतरा बढ़ भी सकता है। इसके अलावा, इबुप्रोफेन को लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में अल्सर, आंतों से खून आना, किडनी खराब होना, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह दवा कई दूसरी दवाओं के साथ रिएक्शन भी कर सकती है।
डॉक्टर साफ कहते हैं कि इबुप्रोफेन को कैंसर से बचाव की दवा मानकर खुद से लेना गलत है। जब तक ठोस और पक्के सबूत न मिलें, तब तक इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। कैंसर से बचाव के लिए सबसे सुरक्षित तरीका आज भी वही है, संतुलित और सूजन कम करने वाला खाना, सही वजन बनाए रखना साथ ही रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम और किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना। भले ही भविष्य में इबुप्रोफेन कैंसर से बचाव की रणनीति का हिस्सा बने, लेकिन फिलहाल स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे भरोसेमंद उपाय है।
Updated on:
22 Jan 2026, 12:48 PM IST
Published on:
22 Jan 2026, 12:48 PM IST
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