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आज सालगिरह पर विशेष : देशभक्ति से ओत-प्रोत था मनोज कुमार का सिनेमा, कई साल से हैं खामोश

एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में 24 जुलाई, 1937 को जन्मे हरिकिशन गोस्वामी को दिलीप कुमार ( Dilip Kumar ) इतने पसंद थे कि उनकी 'शबनम' (1949) ( Dilip Kumar Movie Shabnam ) देखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर मनोज कुमार ( Manoj Kumar ) रख लिया। उस फिल्म में दिलीप कुमार का नाम मनोज था।

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आज सालगिरह पर विशेष : देशभक्ति से ओत-प्रोत था मनोज कुमार का सिनेमा, कई साल से हैं खामोश

आज सालगिरह पर विशेष : देशभक्ति से ओत-प्रोत था मनोज कुमार का सिनेमा, कई साल से हैं खामोश

साठ और सत्तर के दशक को हिन्दी फिल्म संगीत ( Hindi Flim Music ) का सबसे सुनहरा दौर माना जाता है। उस दौर में जिन अभिनेताओं की फिल्में सिल्वर और गोल्डन जुबली मनाया करती थीं, उनमें मनोज कुमार ( Manoj Kumar ) शामिल हैं। एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में 24 जुलाई, 1937 को जन्मे हरिकिशन गोस्वामी को दिलीप कुमार ( Dilip Kumar ) इतने पसंद थे कि उनकी 'शबनम' (1949) ( Dilip Kumar Movie Shabnam ) देखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर मनोज कुमार ( Manoj Kumar real name ) रख लिया। उस फिल्म में दिलीप कुमार का नाम मनोज था। कई फिल्मों में रोमांटिक भूमिकाएं निभाने के बाद बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म 'उपकार' ( Upkar Movie ) से मनोज कुमार ने देशभक्ति फिल्मों की जो अलख जगाई, उन्हें 'भारत कुमार' ( Bharat Kumar ) कहा जाने लगा। मनोज कुमार अब 83 साल के हो चुके हैं और कई साल से फिल्मी चहल-पहल से दूर जिंदगी बसर कर रहे हैं।

'उपकार' ने बदली धारा

'हरियाली और रास्ता', 'वो कौन थी', 'दो बदन' और 'पत्थर के सनम' जैसी कई फिल्मों के नायक मनोज कुमार को 'उपकार' ने नई इमेज दी। यह फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे 'जय जवान जय किसान' पर आधारित थी। इसका गीत 'मेरे देश की धरती सोना उगले' गणतंत्र और स्वाधीनता दिवस पर आज भी गूंजता है। 'उपकार' के बाद उन्होंने 'पूरब और पश्चिम', 'रोटी कपड़ा और मकान' तथा 'क्रांति' जैसी देशभक्ति पर आधारित कुछ और कामयाब फिल्में बनाईं।

फाल्के अवॉर्ड समेत कई सम्मान
मनोज कुमार को 2016 में सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड ( Dadasaheb Phalke Award ) से नवाजा गया। इससे पहले 1992 में वे पद्मश्री ( Padma Shri Awrad ) से अलंकृत किए गए। उन्होंने अभिनय, निर्देशन, संवाद लेखन और संपादन के लिए सात फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। उनकी 'उपकार' को नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

सदाबहार गाने बेशुमार
मनोज कुमार पर फिल्माए गए कई गाने आज भी लोकप्रिय हैं। इनमें 'नसीब में जिसके जो लिखा था', चांद-सी मेहबूबा हो मेरी, पत्थर के सनम, गोरे गोरे चांद-से मुख पे, दीवानों से ये मत पूछो, इकतारा बोले, है प्रीत जहां की रीत सदा, 'इक प्यार का नगमा है' और 'जिंदगी की न टूटे लड़ी' शामिल हैं।