परिवार पहले कपड़ों के व्यापार से जुड़ा था, लेकिन नई जगह पर जीवन दोबारा शुरू करना आसान नहीं था। धीरे-धीरे मेहनत और सामुदायिक सहयोग से उन्होंने नया जीवन बनाया। जियागंज में बसे सिख समुदाय ने एक गुरुद्वारा स्थापित किया, जो केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि लोगों के सामाजिक जुड़ाव का केंद्र भी बन गया। इसी माहौल में अरिजीत का बचपन बीता।