बीएमसी से मिला Kangana Ranaut को एक और बड़ा झटका, ऑफिस तोड़ने के बाद उनकी हाउसिंग सोसाइटी को भी भेजा नोटिस

By: Pratibha Tripathi
| Updated: 16 Sep 2020, 01:32 PM IST
बीएमसी से मिला Kangana Ranaut को एक और बड़ा झटका, ऑफिस तोड़ने के बाद उनकी हाउसिंग सोसाइटी को भी भेजा नोटिस
BMC gave notice to Kangana

बीएमसी ने Kangana Ranaut का ऑफिस तोड़ने के बाद कंगना की सोसाइटी (चेतक) को नोटिस भेज कर सोसायटी से कई डिटेल मांगी है

नई दिल्ली। Kangana Ranaut का बीएमसी से विवाद बढ़ता ही जा रहा है। कंगना ने बीएमसी को 2 करोड़ का नोटिस दिया तो बीएमसी ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए पाली हिल वाला ऑफिस तोड़ने के 6 दिन बाद मंगलवार को Kangana Ranaut की सोसाइटी (चेतक) को नोटिस भेज कर सोसायटी से कई डिटेल मांगी है। आपको बतादें चेतक सोसायटी प्राइवेट सोसायटी नहीं बल्कि सहकारी समिति है। जानकारों का मानना है कि बीएमसी कोई कड़ा एक्शन भी ले सकती है। कंगना पर बीएमसी की भौंहें तनी हुई है क्योंकि इससे पहले भी बीएमसी ने कंगना के खार स्थित घर में अवैध निर्माण हटाने का नोटिस भी दिया था।

बीएमसी ने कंगना की सोसाइटी को नोटिस भेज कर 5 डिटेल्स मांगीं हैं, ये डिटेल्स हैं-

  • सोसायटी मेम्बर्स की जानकारी और पार्टनर्स की लिस्ट
  • बीते 3 सालों में सोसायटी की बैठकों की जानकारी और बैंक खाते की डिटेल
  • चुनाव प्रक्रिया के साथ मेंबर्स की ट्रांसफर लिस्ट
  • रेल हाउस और बंगलों के अलॉकेशन की डिटेल
  • सभी के साथ किये गए एग्रीमेंट और उनके पूरे पेपर्स की जानकारी

बीएमसी के और भड़कने की मुख्य वजह कंगना का बीएमसी से 2 करोड़ मुआवजा मांगना

इससे पहले बीएमसी ने 9 सितंबर को कंगना के पाली हिल स्थित ऑफिस को गैरकानूनी बता कर उसमें तोड़फोड़ की थी। जिस पर कंगना ने विरोध करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बादमें कंगना ने दोबारा पिटीशन लगाकर तोड़फोड़ से हुए नुकसान पर बीएमसी से 2 करोड़ रुपए का मुआवजा दिलाने की मांग की है। हालांकि बीएमसी की कर्रवाई के खिलाफ कंगना महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाकात की थीं। वैसे मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर कंगना को मुआवजा दिलवाने की बात कही थी।

आपको बतादें कंगना ने पाली हिल वाला बंगला 2017 में खरीदा और उसमें कई कार्य कराए जो जनवरी में पूरा हुआ था। इसको कंगना ऑफिस-कम-रेजीडेंस के रूप में स्तेमाल करना चाहती हैं। लेकिन बीएमसी ने इसे अवैध निर्माण बताया था। बीएमसी की दलील है कि 1979 के प्लान के मुताबिक यह बंगला रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के रूप में रजिस्टर्ड है।