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Sushant Singh Rajput के परिवार का आरोप: एक्टर की मौत के कुछ घंटे बाद ही किचन में बनने लगा था खाना, फ्लैटमेट्स के चेहरे पर नही था कोई गम

Sushant Singh Rajput के सभी फ्लैटमेट्स रात को किचन में खाना बना रहे थे सीबीआई लगातार पिछले 5 दिनों से कुक नीरज और सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ कर रही है।

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Sushant Singh Rajput family

Sushant Singh Rajput family

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) की मौत के बाद इस केस की गुत्थी सुलझाने में सीबीआई की टीम काफी तेजी से जांच पड़ताल करने में लगी हुई है। सीबीआई को सुशांत की मौत जुड़े कई सुराख हाथ भी लग चुके है। लेकिन इसी बीच सुशांत (Sushant Singh Rajput family) की फैमिली की तरफ से एक बड़ा बयान सामने आया है। जिसमें परिवार वालों ने यह आरोप लगाया है कि जिस दिन सुशांत की मौत हुई थी उस दिन सुशांत (Sushant's flatmates)के फ्लैटमेट्स बिना किसी दुख के किचन में खाना बना रहे थे।

मिली जानकारी के मुताबिक, सुशांत की फैमिली बताया है कि 14 जून को सुशांत की मौत के बाद जब हम लोग रात को उनके फ्लैट पर पहुंचे थे तो वहां पर मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर सुशांत के जाने का कोई गम नही था। सभी लोग चेहरे बेहद सामान्य नजर आ रहे थे। और, सुशांत (Sushant's flatmates) के सभी फ्लैटमेट्स रात को किचन में खाना बना रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो।

सुशांत के परिवार वालों के यह बात जानने के बाद लोग यही कह रहे है कि कि आखिर घर में मौजूद ये चारों लोग ऐसा गंदा व्यवहार कैसे कर सकते हैं। जब उनका बेस्ट फ्रैंड उनके बीच मौजूद ना हो, इसी बात को जानने के बाद सीबीआई लगातार पिछले 5 दिनों से कुक नीरज और सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा सीबीआई लगातार सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत और केशव से भी पूछताछ कर रही है।

सुशांत के निधन वाले दिन उनके घर पर क्या-क्या हुआ था?

सुशांत केस में सीबीआई ने जब सिद्धार्थ पिठानी से कई तरह के सवाल किए को उस दौरान सिद्धार्थ ने अपने बयान में 14 जून का पूरा किस्सा बंया किया। जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ ने अपने बयान बताया कि, 14 जून की सुबह 10-10.30 के बीच मैं हॉल में अपना काम कर रहा था तभी मेरे दोस्त केशव ने 10.30 बजे के करीब आकर मुझे बताया कि सुशांत सर दरवाजा नहीं खोल रहे हैं। इसके बाद मैंने दिपेश को बुलाया और हम दोनों ने जाकर दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुशांत ने दरवाजा नहीं खोला। तभी मुझे मीतू दीदी का फोन आया और उन्होंने कहा कि मैंने सुशांत को फोन किया लेकिन वह फोन उठा नहीं रहा। हमने उन्हें बताया कि हम भी कोशिश कर रहे हैं लेकिन वह दरवाजा नहीं खोल रहा है। मैंने मीतू दीदी को घर बुलाया।

इसके बाद मैंने वॉचमैन से को चाबीवाले को बुलाने के लिए कहा लेकिन वॉचमैन ने कोई मदद नहीं की। फिर गूगल पर सर्च करने पर रफीक चाबीवाले का नंबर मिला। दोपहर 1.06 मिनट पर चाबी वाले को कॉल किया। उसने मुझसे 2000 रुपये मांगे। दोपहर 1.20 मिनट पर रफीक अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा। उसने लॉक देखकर चाबी नहीं बनाने की बात कही तो मैंने उसे लॉक तोड़ने के लिए कहा। रफीक ने लॉक तोड़ा और मैंने उसे पैसे देकर जाने के लिए कहा। फिर मैं और दिपेश कमरे में गए। वहां बहुत अंधेरा था। दिपेश ने लाइट जलाई तो सामने देखा सुशांत हरे रंग के कपड़े से पंखे पर लटका हुआ था।

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