
पंकज उधास को था पैंक्रियाटिक कैंसर
गजल गायकी में अपनी अलग शैली से बनाया मुकाम, ‘चिट्ठी आई है’, ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’, ‘जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके’ और ‘दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है’ जैसे दर्जनों गीत-गजलों के गायक पंकज उधास (72) नहीं रहे। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में सोमवार सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे।
अस्सी के दशक में गजल गायकी की लहर में जो नई आवाजें तेजी से उभरी और संगीतप्रेमियों पर छा गईं, उनमें पंकज उधास की आवाज शामिल थी। अपने पहले एलबम ‘आहट’ से उन्होंने सुरों का रंग जमाया। यह एलबम-दर-एलबम गहरा होता गया। ‘आहट’ की ‘तुम आए जिंदगी में तो बरसात की तरह/ और चल दिए तो जैसे खुली रात की तरह’ और ‘तोडऩा टूटे हुए दिल का बुरा होता है/ जिसका कोई नहीं, उसका तो खुदा होता है’ जैसी गजलों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी मुलायम आवाज में कई गजलें लोकप्रिय हुईं। इनमें ‘दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है’, ‘तुम न मानो मगर हकीकत है’, ‘दर्द की बारिश सही मधम जरा आहिस्ता चल’, ‘कैसे कह दूं कि मुलाकात नहीं होती है’, ‘ये अलग बात है साकी कि मुझे होश नहीं’ आदि शामिल हैं।
51 रुपए का पहला इनाम, फिर लाखों कमाए
गुजरात के जेतपुर (राजकोट) में 17 मई,1951 को जन्मे पंकज उधास के बड़े भाई मनहर उधास पहले से गायन में सक्रिय थे। उनसे प्रेरणा लेकर पंकज उधास ने 11 साल की उम्र में नवरात्रि पर एक कार्यक्रम में पहली बार ‘ए मेरे वतन के लोगो जरा आंख में भर लो पानी’ गाया था। उनकी गायकी से खुश होकर तब उन्हें 51 रुपए का इनाम दिया गया था। यह उनकी पहली कमाई थी। बाद में उनके हर एलबम ने लाखों रुपए कमाए।
‘न कजरे की धार’ समेत कई फिल्मी गाने
पंकज उधास को 2006 में पद्मश्री से नवाजा गया। उन्होंने ‘चिट्ठी आई है’, ‘आज फिर तुमपे प्यार आया है’, ‘न कजरे की धार’, ‘मोहब्बत इनायत करम देखते हैं’, ‘दिल देता है रो-रो दुहाई’ समेत कई लोकप्रिय फिल्मी गाने गाए। देश-विदेश में उनके स्टेज शो में ‘नाम’ के ‘चिट्ठी आई है’ की सबसे ज्यादा फरमाइश होती थी।
Published on:
27 Feb 2024 08:58 am
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