पिता और गुलशन कुमार की मौत से टूट गए थे समीर
Divya Singhal
Publish: Feb, 24 2015 04:17:00 (IST)
पिता और गुलशन कुमार की मौत से टूट गए थे समीर

समीर को पिता अंजान की मौत और अपने मार्गदर्शक गुलशन कुमार की हत्या के बाद गहरा सदमा पहुंचा।

बैंक अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरूआत करने के बाद बॉलीवुड में अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करने वाले गीतकार समीर लगभग चार दशक से सिने प्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे हैं। मशहूर शायर और गीतकार शीतला पांडेय उर्फ समीर का जन्म 24 फरवरी 1958 को बनारस में हुआ। उनके पिता अंजान फिल्म जगत के मशहूर गीतकार थे। बचपन से ही समीर का रूझान अपने पिता के पेशे की ओर था। समीर ने परिवार के जोर देने पर बैंक अधिकारी की नौकरी की, लेकिन उनका मन नहीं लगा और उन्होंने नौकरी छोड़ दी।


अस्सी के दशक में गीतकार बनने का सपना लिए समीर ने मुंबई की ओर रूख किया। लगभग तीन वर्ष तक मुंबई में रहने के बाद वह गीतकार बनने के लिए संघर्ष करने लगे। 1983 में उन्हें "बेखबर" फिल्म के लिए गीत लिखने का मौका मिला। इस बीच समीर को "इंसाफ कौन करेगा", "दो कैदी", "रखवाला", "बीबी हो तो ऎसी" जैसी कई बड़े बजट की फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, लेकिन इन फिल्मों की असफलता के कारण वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में नाकामयाब रहे। लगभग दस वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद वर्ष 1990 में आमिर खान और माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म "दिल" के गीत "मुझे नींद ना आए" की सफलता के बाद समीर गीतकार के रू प में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। वर्ष 1990 में ही उन्हें महेश भट्ट की फिल्म "आशिकी" में भी गीत लिखने का अवसर मिला। जिनकी सफलता के बाद समीर को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए।


वर्ष 1997 में अपने पिता अंजान की मौत और अपने मार्गदर्शक गुलशन कुमार की हत्या के बाद समीर को गहरा सदमा पहुंचा। उन्होंने कुछ समय तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया और वापस बनारस चले गए, लेकिन उनका मन वहां भी नहीं लगा और एक बार फिर नए जोश के साथ वह मुंबई आ गए और 1999 में प्रदर्शित फिल्म "हसीना मान जाएगी" से अपने सिने करियर की दूसरी पारी शुरू की। समीर ने अपने तीन दशक के अपने करियर में लगभग 500 हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखे। समीर को अब तक तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने हिंदी के अलावा भोजपुरी और मराठी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे है। समीर आज भी उसी जोशोखरोश के साथ फिल्म जगत को सुशोभित कर रहे है।