
बॉलीवुड के फेमस फिल्ममेकर डायरेक्टर कबीर खान को अक्सर किसी न किसी वजह से ट्रोल किया जाता है। इस बात को लेकर एक इंटरव्यू के दौरान कबीर खान का दर्द छलका। कबीर खान ने राष्ट्रवाद और देशप्रेम में अंतर बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ये जरुरी नहीं है कि देश के लिए प्यार जताने के लिए दूसरा पक्ष भी दिखाया जाए। कबीर ने कहा कि कभी-कभी हम अपनी फिल्मों में तिरंगा दिखाते हैं, लेकिन राष्ट्रवाद और देशप्रेम में बहुत अंतर है। दिसंबर 2021 में रिलीज हुई फिल्म ’83’ का निर्देशन कबीर खान ने किया है।
इस फिल्म में जिस तरह से पाकिस्तान और उसकी फ़ौज का महिमामंडन किया गया है और ‘अच्छा मुस्लिम’ वाले कॉन्सेप्ट को आगे बढ़ाया गया है। वैसे ये सब नया नहीं है, क्योंकि बॉलीवुड सलीम-जावेद के जमाने से ही इस तरह के हिन्दूफोबिया भरे प्रोपेगंडा में लगा हुआ है। अब कबीर खान जैसे फिल्म निर्देशक इसी धारा की अगली उपज हैं, जो हिन्दू विरोधी दृश्यों के माध्यम से हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगे हुए हैं।
2015 में आई ‘बजरंगी भाईजान’ उस समय तक की सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्मों में से एक थी और बाद में चीन में भी रिलीज होकर इसने अच्छा कारोबार किया। इसके बाद फिल्म को चीन में रिलीज किया गया, जहाँ ये बड़ी हिट रही। आमिर खान ने चीन में जो बाजार बनाया है, उसका खान तिकड़ी की फायदा बाकी भारतीय फिल्मों को भी मिलता रहा है। लेकिन, हनुमान जी के नाम पर बनाई गई इस फिल्म में हिन्दुओं के विरोध में काफी कुछ दिखाया गया। ‘बजरंगी भाईजान’ में सलमान खान ने पवन कुमार चतुर्वेदी नाम के एक ब्राह्मण का किरदार निभाया है, जो शुद्ध शाकाहारी है और साथ ही हनुमान जी का एक बड़ा भक्त भी।
हिन्दू, और उसमें भी खासकर ब्राह्मण मिल जाए तो बॉलीवुड के लिए काम आसान हो जाता है। उन्हें जितना भी बदनाम किया जाए, कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें न विरोध का भय होता है, न उनकी भावनाओं का। इसीलिए, इस फिल्म में भी एक छोटी सी मुस्लिम लड़की का किरदार है, जो पीड़ित है। जो पीड़ित है जिसे सलमान खान पाकिस्तान छोड़ने जाते है। इसके अलावा एक पत्रकार मिलता है। वो भी अपनी जान जोखिम में डाल कर भारतीयों की मदद करता है। क्या आपने कभी वास्तविकता में पाकिस्तानी मौलवियों को ऐसा करते देखा है? असल में वहाँ के मस्जिदों में लड़कियों को सिर कलम करने की ट्रेनिंग दी जाती है। मौलवी ईशनिंदा का केस करा देते हैं। वहाँ के क्रिकेटर तक ‘गजवा-ए-हिन्द’ का समर्थन करते हुए जिहाद फैलाते हैं। किसी महिला को ‘हूर’ बना कर प्रदर्शनी लगाई जाती है। जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनता है तो मुल्ला-मौलवी इसके विरोध में सड़क पर उतर आते हैं।
लेकिन, कबीर खान की फिल्म में सारे पाकिस्तानी अच्छे होते हैं। वहाँ का मौलवी पुलिसकर्मियों से पंगा लेकर भारतीय नागरिकों को बचाता है। वहाँ का पत्रकार कॉमेडी करता है और सीधा-सादा होता है। जबकि वास्तविकता में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी पत्रकार भारत के खिलाफ ज़हर उगलते नहीं थकते। इसका सीधा अर्थ है कि कबीर खान पाकिस्तान का प्रोपेगंडा आगे बढ़ा रहे हैं। इस्लामी कट्टरवादी सोच को हवा दे रहे हैं। साथ ही वो हिन्दुओं को तो नीचा दिखा ही रहे हैं। वहीं जिन पाकिस्तानी फौजियों के कारण कई भारतीय नागरिकों और सैनिकों की जान गई है, लेकिन कबीर खान की फिल्म में वो मानवता के प्रतीक होता हैं – एकदम उलटा। फिल्म ’83’ में दिखाया गया है कि भारतीय सेना के निवेदन पर पाकस्तानी फौजी सीमा पर गोलीबारी रोक देते हैं, ताकि भारतीय सैनिक शांति से स्कोर सुन सकें। जबकि सच्चाई ये है कि जून 2019 में जब पाकिस्तान ने विश्व कप मैच में पाकिस्तान को हराया था, तो उस दिन भी पाकिस्तानी फ़ौज ने सीजफायर का उल्लंघन किया था।
इसके अलावा ’83’ में एक ‘अच्छा मुस्लिम’ भी है, जो बुजुर्ग है और इस्लामी टोपी पहनता है। वो भारत का मैच देखने के लिए इतना बेचैन होता है कि कर्फ्यू के दौरान भी पुलिसकर्मियों से छिप कर अपना एंटीना ठीक करता है। जीत के जश्न में आगे बढ़ कर शामिल होता है। जबकि वास्तविकता ये है कि कई मुस्लिम बहुल इलाकों में हालिया T20 विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार के बाद पटाखे छोड़े गए।
इसी तरह 2009 में कबीर खान की एक फिल्म आई थी ‘न्यूयॉर्क’, जिसमें आतंकवादियों को ही पीड़ित दिखा दिया गया था। इसी तरह उनकी फिल्म ‘काबुल एक्सप्रेस’ में ‘देखा खुदा कैसे तुझे बनाया काफिर से इंसान’ जैसे गानों के सहारे सलामी कट्टरपंथी सोच को आगे बढ़ाया गया है। कबीर खान की अगली फिल्म का नाम ‘पवन पुत्र भाईजान’ हो सकता है, जिसमें सलमान खान ही अभिनेता होंगे। हनुमान जी के नाम से एक बार फिर से हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा चलेगा।
फिल्मों में ही नहीं, वास्तविकता में भी कबीर खान ऐसे ही बयान देते रहते हैं। उन्होंने मुगलों को भारत का निर्माता करार दिया। उन मुगलों को, जो हिन्दुओं के नरसंहार और मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए कुख्यात रहे हैं। फिल्म के माध्यम से आतंकवादियों के साथ सहानुभूति पैदा करना और मीडिया के माध्यम से इस्लामी आक्रांताओं का गुणगान – यही कबीर खान का काम है। भारतीयों की हत्या में मजे लेने वाली पाकिस्तानी फ़ौज का महिमामंडन भी वो करते रहे हैं।
Updated on:
05 Apr 2022 01:47 pm
Published on:
05 Apr 2022 01:43 pm
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