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पिता की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए कादर खान ने 15 साल किया इस्लाम धर्म के लिए ये बड़ा काम

पर एक बात सोचने वाली है, कि इतने साल देने के बाद धीरे-धीरे कादर इंडस्ट्री छोड़ने का ख्याल क्यों और कब आया।

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मुंबई

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Riya Jain

Jan 03, 2019

kader khan books on islam and quran work for islamic studies

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बॅालीवुड के दिग्गज अभिनेता कादर खान के निधन की खबर से अभी तक बॅालीवुड जगत नहीं उभर पाया है। लगातार स्टार्स उनके मृत्यू पर अपने शोक जता रहे हैं। Kader Khan ने लोगों के दिलों ऐसी छाप छोड़ी है कि उनके जानें के बाद लोगों को अहसास हो रहा है कि वे इस इंडस्ट्री का कितना अजीज हीरा थे। कादर खान ने इस इंडस्ट्री को कई साल दिए। उनकी फिल्मों के डॅायलॅाग्स अभी तक लोगों के जहन में बसे हैं। अमिताभ बच्चन को शहंशाह बनाने वाले कादर खान ने इस सिनेमाजगत को कई बेहतरीन फिल्मों से नवाजा है। पर एक बात सोचने वाली है, कि इतने साल देने के बाद धीरे-धीरे कादर इंडस्ट्री छोड़ने का ख्याल क्यों और कब आया।

बॅालीवुड स्टार कादर में आप शायद ये नहीं जानते होंगे कि वे Quranic scholar भी रह चुके हैं। इस बारे में कादर के करीबी दोस्त और एक पत्रकार जावेद जमालुद्दिन ने बताया। उनके दोस्त ने बताया कि कादर ने इस्लामिक स्टडीज का भी एक सिलेबस तैयार किया था जिसमें उर्दू और अरेबिक भाषा को आसान भाषा में समझाया गया था।

दरअसल, कादर के पिता कि ये ख्वाहिश थी कि उनका बेटा इस्लाम के बारे में लोगों को समझाए और इसके बारे में लोगों की गलत सोच को बदले। हॅालेंड में शिफ्ट होने के बाद कादर ने वहां एक इस्लामिक कॅालेज बनवाया। दरअसल कादर के पिता ने ये बात उन्हें समझाई थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह तुम्हें बॅालीवुड की नॅालेज न होने के बावजूद डॅायलॅाग लिखने और सीन बनाने में महारत हासिल हुई उसी तरह तुम इस्लामिक स्टडीज में भी लोगों की मदद करो। उसी दिन कादर ने अपना मन इस ओर बड़ा लिया था। इसके बाद कादर ने इस्लामिक स्टडीज में एमए किया।

इसके बाद उन्होंने मुंबई में ही एक टीम बनाई जिनके साथ उन्होंने इस्लाम के कोर्सिज बनाए जिसमें नर्सरी से पोस्ट ग्रेजुएट तक के सभी चैप्टर्स बनाए गए। इसके बाद उन्होंने पहले दुबई और फिर हॅालेंड में अपने के.के यूनिवर्सिटी कॅालेज बनाए। 2005 में पिता की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के बाद वह बहुत खुश हुए थे। अपनी मौत से पहले कादर चाहते थे कि उनकी के.के यूनिवर्सिटी को अमरीका, कनाडा जैसी जगहों पर भी खोल दी जाए।