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जब ‘दो आने’ के लिए रो पड़ी थी लता मंगेशकर, जानें पूरी कहानी

Lata Mangeshkar Childhood Story: आज भारत रत्न लता मंगेशकर की दूसरी पुण्यतिथि पर उनके बचपन से जुड़ा एक किस्सा जानते हैं, जब लता जी दो आने के लिए फूट-फूटकर रो पड़ी थीं।

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Lata Mangeshkar Bharat Ratna cried in childhood for two anna

'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर पुण्यतिथि विशेष।

Lata Mangeshkar Death Anniversary: ‘स्वर कोकिला’ कही जाने वाली भारत रत्न लता मंगेशकर की आज दूसरी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 6 फरवरी 2022 को उनका निधन हुआ था। लता जी के स्वर के दीवाने केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हैं। आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर लता जी के बचपन का एक अनोखा किस्सा सुनाने जा रहे हैं।


‘दो आना’ बना रोने की वजह
Lata Mangeshkar Unknown Story:
एक रेडियो शो में अनु कपूर ने लता मंगेशकर के बचपन से जुड़ा हुआ एक किस्सा सुनाया था। किस्सा कुछ यूं है- बात उन दिनों की है जब लता मंगेशकर छोटी थी और उनका परिवार पूना में रहा करता था। एक दिन उनकी मां ने नौकरानी को दुकान से साबुन लाने को भेजा, कुछ देर बाद नौकरानी वापस आई और कहा कि “दुकानदार कह रहा है कि ये दो आने का सिक्का खोटा है”।

लता मंगेशकर भी वहीं थी। उन्होंने झट से नौकरानी के हाथ से वो दो आने का सिक्का लिया और कहा, “रुक मैं लेकर आती हूं” और दुकान पर जा पहुंची। वहां जाकर उन्होंने दुकानदार से साबुन देने को कहा। दुकानदार जैसे ही साबुन लेने को मुड़ा, उन्होंने दुकान में रखी पेटी में झट से वो सिक्का डाल दिया। फिर लता जी ने दुकानदार से कहा कि उन्होंने पैसा पेटी में डाल दिया।

लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर का बहुत नाम था। इसलिए दुकानदार के मन में कोई संदेह नहीं आया। वापस घर आकर लता मंगेशकर ने बड़े रौब के साथ मां को बताया कि “देखो मैं ले आई”।

Lata Mangeshkar Childhood image IMAGE CREDIT:

और लता मंगेशकर फूट-फूटकर रोने लगीं
संयोग से उनके पिता भी वहीं मौजूद थे। उन्होंने लता जी से पूछ लिया कि “वो सिक्का तो खोटा था, खोटे सिक्के से कैसे साबुन ले आई”। ये सुनकर लता मंगेशकर चुप रह गईं। बेटी की खामोशी देखकर मां ने पूछा “बता कैसे ले आई”, मां के बहुत जोर देने पर लता जी को बताना ही पड़ा कि वो कैसे साबुन ले आईं। पूरी बात जानने के बाद मां ने उनके हाथ में दो आने का सिक्का रखा और कहा कि “जाओ ये दुकानदार को दे आओ और उससे माफी भी मांगो”। लता मंगेशकर वहां बैठ कर रोईं ताकि बेइज्जती से बच जाएं। लेकिन पिता ने उन्हें उठाया और कहा, “माफी तो मांगने तुम्हें जाना ही पड़ेगा”।

माता पिता की बात बन गई सीख
ये बचपन घटना उनके दिमाग में घर कर गई। ईमानदारी की शिक्षा जो उन्हें माता-पिता से मिली।

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