
आज सपन चक्रवर्ती की बरसी पर विशेष: तुम भी चलो, हम भी चलें
-दिनेश ठाकुर
कहा जाता है कि घने बरगद के साए तले कोई दूसरा पौधा नहीं पनप पाता। संगीतकार सपन चक्रवर्ती ( Sapan Chakraborty ) के साथ यह कहावत काफी हद तक सही साबित हुई। वे आर.डी. बर्मन ( R. D. Burman ) के पांच सहायकों में से एक थे। जाहिर है, गुणी थे, विभिन्न वाद्यों (खासकर आर.डी. बर्मन के पसंदीदा इलेक्ट्रॉनिक वाद्यों) की गहरी समझ रखते थे, लेकिन स्वतंत्र संगीतकार की हैसियत से वे हिन्दी फिल्मों में लम्बी पारी नहीं खेल पाए। अमिताभ बच्चन ( Amitabh Bachchan ) और सायरा बानो की 'जमीर' (1975) में उनका संगीत ताजा बहार के खुशबूदार झोंकों की तरह था। इस फिल्म के किशोर कुमार ( Kishore Kumar ) की आवाज वाले 'तुम भी चलो हम भी चलें, चलती रहे जिंदगी', 'जिंदगी हंसने-गाने के लिए है पल दो पल' और 'फूलों के डेरे हैं, साए घनेरे हैं' अपने जमाने में खूब चले। आज भी गुनगुनाए जाते हैं। साहिर लुधियानवी की शायरी को सपन चक्रवर्ती ने मूड के हिसाब से धुनों में बांधा, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के उन मंत्रों को मुट्ठी में नहीं बांध पाए, जो किसी फनकार की कामयाबी के सिलसिले को आगे बढ़ाते हैं।
नंदा की 'नया नशा' (1973) संगीतकार की हैसियत से सपन चक्रवर्ती की पहली फिल्म थी। इसमें 'आओ करें बातें' (लता मंगेशकर), एक लड़की ले गई दिल (किशोर कुमार) और 'कश पे कश लगाने दे' (आशा भौसले) जैसे गाने थे। हरि दत्त के निर्देशन में बनी यह फिल्म नहीं चली। इसलिए इसके संगीत को उभरने का मौका नहीं मिला। सपन चक्रवर्ती की दूसरी फिल्म 'छत्तीस घंटे' (1974) की भी यही कहानी रही। राज तिलक के निर्देशन में बनी यह फिल्म सुनील दत्त, राज कुमार, माला सिन्हा, परवीन बॉबी और डैनी जैसे सितारों के जमघट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई। यहां भी सपन चक्रवर्ती और साहिर की सलीकेदार जुगलबंदी थी। तीन गाने 'यहां बंधु आते को है जाना' (मुकेश), 'चुप हो आज कहो क्या है बात' (किशोर कुमार, आशा भौसले) और 'तीनों लोक पर राज तिहारा' (आशा, महेंद्र कपूर) अच्छे थे। उनकी एक और फिल्म 'जब अंधेरा होता है' (1974) कब आई, कब गई, किसी का ध्यान नहीं गया।
सपन चक्रवर्ती शौकिया गायक थे। आर.डी. बर्मन ने उनसे कई गाने गवाए। इनमें अमिताभ बच्चन की 'सत्ते पे सत्ता' का 'प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया' आज भी लोकप्रिय है। सपन चक्रवर्ती के अलावा इसमें किशोर कुमार और आर.डी. बर्मन की आवाज है। बतौर गायक उनके दूसरे गानों में 'गोलमाल है भई सब गोलमाल है' (गोलमाल/ आर.डी. के साथ), मेरे साथ चले न साया (किताब), प्रीतम आन मिलो (अंगूर) और 'कायदा कायदा' (खूबसूरत/ रेखा के साथ) शामिल हैं। आर.डी. बर्मन के देहांत के सालभर बाद 23 अगस्त, 1995 को सपन चक्रवर्ती भी दुनिया को अलविदा कह गए।
Updated on:
23 Aug 2020 02:44 am
Published on:
22 Aug 2020 11:31 pm
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
