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शाहरुख को यूं हुआ गौरी से प्यार, शादी पर मचा था बवाल!

शाहरुख को यूं हुआ गौरी से प्यार, शादी पर मचा था बवाल, धर्म बना दीवार और इस हरकत से परेशान होकर छोड़कर चलीं गई थी गौरी...

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Bhup Singh

Oct 08, 2017

Shahrukh_Gauri

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बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान 47 साल की हो चुकी हैं। गौरी छिब्बर (अब खान) का जन्म 8 अक्टूबर, 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। शाहरुख की पत्नी होने के बावजूद गौरी ने अपनी एक अलग और खास पहचान बनाई हैं। इंडस्ट्री में वे प्रोड्यूसर और इंटीरियर डिजाइनर के तौर पर मशहूर हैं। फिल्मी दुनिया के सबसे सफल सितारों में से एक शाहरुख खान की प्रेम कहानी कम फिल्मी नहीं है। पहले प्यार फिर शादी और 26 साल का साथ, बॉलीवुड में जहां कुछ महीनों में ही रिश्ते टूट जाते हैं वहां शाहरुख और गौरी की जोड़ी एक मिसाल है। बॉलीवुड के किंग खान शाहरूख को रोमांस को किंग कहा जाता है। शाहरूख पर तो लाखों लड़कियां मरती है, लेकिन उनका दिल केवल गौरी के लिए धड़कता है। शाहरूख और गौरी का रिश्ता फिल्म इंडस्ट्री में एक मिसाल है। हालांकि इस दौरान कुछ एक्ट्रेसेस के साथ शाहरूख का नाम भी जुड़ा था, लेकिन गौरी इन सब अफवाहों से प्रभावित होने वालों में से नहीं हैं। उनका रिश्ता हमेशा से बहुत मजबूत रहा है। लेकिन एक वक्त था जब अपने प्यार को पाने के लिए शाहरूख को बहुत संघर्ष करना पड़ा था। शाहरूख की रियल लाइफ लव स्टोरी किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से कम नहीं है।

1984 में हुई पहली मुलाकात
बात 1984 की है, जब दिल्ली के पंचशील क्लब में एक पार्टी चल रही थी। शाहरूख पहली बार 1984 में गौरी छिब्बर से मिले थे। इस पार्टी में 18 साल के शाहरूख की नजर 14 साल की गौरी छिब्बर पर पड़ी और शाहरूख के दिल में कुछ कुछ होने लगा। पहली ही नजर में शाहरूख को गौरी बेहद खूबसूरत लगी। लेकिन शाहरूख अपने शर्मिले स्वभाव के चलते गौरी से डांस के लिए नहीं पूछ पाए। उन्होंने अपने एक दोस्त को गौरी से पूछने को कहा। गौरी को पहली बार में शाहरूख ज्यादा पसंद नहीं आए, लेकिन धीरे-धीरे वह भी उनकी तरफ आकर्षित होने लगी।

तीसरी मुलाकात में मिला गौरी का नंबर
अपने शर्मिले नेचर के चलते पहली बार में गौरी का नंबर नहीं ले पाए थे। 25 अक्टूबर 1984 को तीसरी मुलाकात में शाहरूख ने गौरी का नंबर हासिल किया। उनके घर का नंबर मिलने के बाद शाहरूख अपनी किसी दोस्त से गौरी के घर फोन करवाते थे और जो भी फोन उठाता उसे शाहरूख की दोस्त शाहीन नाम बताता। ये नाम ही वह कोडवर्ड था, जिससे गौरी पहचान जाती थी कि शाहरूख का कॉल है। बस फिर दोनों बहुत देर तक बातें किया करते थे।

शाहरूख ने किया प्रपोज, लेकिन नहीं सुना जवाब
शाहरूख और गौरी अक्सर पार्टिज में मिलते थे, इस दौरान गौरी की फ्रेंड्स भी उनके साथ होती थी। बाद में दोनों लॉन्ग ड्राइव्स पर भी जाने लगें। शाहरूख ने गौरी का ड्राइविंग भी सिखाई। बस यहीं से शुरू हुई यह खूबसूरत लव स्टोरी। शाहरूख गौरी को इंप्रेस करने के लिए "गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा...मैं तो गया मारा" गाना भी गाते थे। मुश्ताक शेख की बुक Shahrukh में शाहरूख ने बताया कि एक दिन मैंने गौरी को उसके घर छोड़ा। जब वो गाड़ी से उतर रही थी, तो मैंने उससे कहा कि मैं तुमसे शादी करूंगा। इतना बोलने के बाद मैं बिना जवाब सुने वहां से चला गया।

पजेसिव ब्वॉयफ्रेंड थे शाहरूख
एक मैगजीन में छपे आर्टिकल में शाहरूख ने बताया कि उस वक्त गौरी को लेकर मेरी दीवानगी बेहद बढ़ चुकी थी। अगर वो स्विमसूट पहनती या अपने बाल खुले रखती तो मैं उससे लड़ने लगता था। खुले बालों में गौरी बेहद खूबसूरत लगती थी। मैं नहीं चाहता था कि दूसरे लड़के उसे देखें। मेरे अंदर इनसिक्योरिटी पैदा हो गई थी, क्योंकि हम ज्यादा मिल नहीं पाते थे और अपने रिलेशन के बारे में ज्यादा बात नहीं कर पाते थे। राइटर मुश्ताक शेख की बुक Shahrukh के मुताबिक उस वक्त शाहरूख गौरी से कहते थे कि "मैं ये नहीं कहता कि मेरे साथ बैठो, बस दूसरों के साथ मत बैठो।

धर्म बना प्यार में दीवार
शाहरूख एक मीडिल क्लास मुस्लिम फैमिली से थे। जब शाहरूख 15 साल के थे, तब उनके पिता मीर ताज मोहम्मद की कैंसर से मौत हो गई थी। उनकी मां लतीफ फातिमा एक्सेक्यूटिव मजिस्ट्रेट थी। शाहरूख की मां उन्हें और उनकी बहन शहनाज लालारूख के साथ दिल्ली के गौतम नगर में रहने लगी थी। वहीं दूसरी तरफ गौरी एक अमीर पंजाबी ब्राह्मण परिवार से थी। उनके पिता रिटायर्ड आर्मी अफसर रमेश छिब्बा थे। गौरी दिल्ली के पॉश इलाके पंचशील पार्क में एक ज्वॉइंट फैमिली में रहती थी। घर में उनके मामा तेजिंदर तिवारी और उनकी फैमिली समेत 15 लोग रहते थे। शाहरूख और गौरी के प्यार में धर्म के साथ-साथ आर्थिक स्टेट्स भी बड़ा सवाल था।

गौरी होने लगी थी दूर
शाहरूख और गौरी के इस प्यार को 5 साल हो गए थे। शाहरूख टीवी सीरियल्स दूसरा केवल और दिल दरिया की शूटिंग में बिजी हो गए। वहीं गौरी दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन करके फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने लगी थी। धीरे-धीरे गौरी अपने रिश्ते को लेकर परेशान होने लगी थी। धर्म, आर्थिक स्टेट्स और शाहरूख का पॉजिसिव नेचर इन सबके चलते गौरी शाहरूख से दूर होने लगी थी।

गौरी का 19वां बर्थडे
गौरी को लेकर शाहरूख की दीवानगी दिनों दिन बढ़ती ही जा रही थी। जब गौरी का 19वां बर्थडे आया तो शाहरूख ने अपने कमरे को बहुत खूबसूरती से सजाया और गौरी के लिए बहुत से गिफ्ट्स रखें। अपने बर्थडे के लिए शाहरूख का ये दीवानापन देखकर गौरी की आंखे भर आई। शाहरूख को समझ ही नहीं आया कि वे रो क्यों रही है। अपने बर्थडे के अगले ही दिन गौरी उन्हें बिना बताएं अपनी फ्रेंड्स के साथ मुंबई चली गई।

शाहरूख की गौरी के लिए दीवानगी
गौरी के जाने के बाद शाहरूख को अहसास हुआ कि वह उनके बिना नहीं रह सकते हैं। शाहरूख ने अपनी मां को सारी बात बताई, तब उनकी मां ने शाहरूख को 10,000 रूपए देकर गौरी को ढूंढने के लिए मुंबई भेज दिया। फिर शाहरूख मुंबई गए और गौरी की तलाश में पूरे शहर में भटकते रहे। शाहरूख के पास गौरी का कोई एड्रेस नहीं था, लेकि न वे इतना जानते थे कि गौरी को समंदर किनारे जाना बेहद पसंद हैं। शाहरूख ने गौरी को खूब ढूंढा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल पा रहा था। उनके दोस्त उन्हें बार-बार दिल्ली जाने के लिए बोल रहे थे। शाहरूख मुंबई में 2 दिन अपने दोस्त के घर रहे, लेकिन जब उसके पैरेंट्स आ गए तो शाहरूख ने वीटी स्टेशन की बेंच पर रात गुजारी।

मुश्ताक शेख की बुक Shahrukh में शाहरूख के दोस्त बेनी ने बताया कि वीटी स्टेशन की बेंच पर रात गुजारने के बाद जब हम सुबह उठे तो होटल ताज में मरम्मत का काम चल रहा था। हम चुपके से होटल के बाथरूम में घुस गए और वहां नहा कर तैयार होकर मरीन ड्राइव चले गए। यहीं आकर शाहरूख ने मेरे सामने कहा था कि एक दिन मैं इस शहर पर राज करूंगा।

आखिर मिल ही गई गौरी
गौरी की तलाश में शाहरूख ने बेंच पर रात बिताई, सड़कों पर खाना खाया, लेकिन गौरी का कुछ पता नहीं चल पाया। इससे शाहरूख बहुत निराश हो गए। उत्तर मुंबई के गोराई बीच से लौटते हुए शाहरूख को एक प्राइवेट बीच दिखा, उन्होंने ऑटो ड्राइवर को उस बीच पर चलते के लिए कहा। बस यहीं शाहरूख का गौरी से मिलन हुआ। अपनी जीवनी में शाहरूख ने बताया कि "वो वहीं थी। एक टी-शर्ट पहने हुए...समंदर किनारे खड़ी थी। वो मेरे पास आई और मुझे गले से लगाकर रोने लगी। तब मुझे लगा कि मैं बेकार में ही उस पर जरूरत से ज्यादा हक जमान लगा था। मुझे अहसास हो गया कि मुझसे ज्यादा गौरी से कोई प्यार कर ही नहीं सकता।" उस वक्त दोनों को लगा कि अब वह एक-दूसरे से जुदा नहीं रह सकते और उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया।

शादी पर मचा बवाल
शाहरूख और गौरी की लव स्टोरी का सबसे मुश्किल दौर तब ही शुरू हो गया। दोनों की शादी में सबसे बड़ी मुश्किल थी, दोनों का अलग-अलग धर्मो से होना। शाहरूख मुस्लिम थे और गौरी हिंदू ब्राहमण। गौरी के पैरेंट्स को रिश्ता बिल्कुल मंजूर नहीं था। उस वक्त शाहरूख सैटल्ड नहीं थे, जिसके चलते भी गौरी के पैरेंट्स को वह पसंद नहीं थे।

आखिरकार जीत गया प्यार
शाहरूख और गौरी की शादी के लिए गौरी के पैरेंट्स ने बिल्कुल मना कर दिया। लेकिन दोनों ने उनको खूब समझाया और आखिरकार उन्हें मनाने में कामयाब रहे। गौरी के पिता ने हां कर दी और 1991 में शाहरूख और गौरी की शादी हुई। तब गौरी केवल 21 साल की थी। वहीं शाहरूख बॉलीवुड में हीरो बनने का सपना देख रहे थे।

एक खूबसूरत फेरीटेल
करियर के शुरूआती कठिन दौर में गौरी ने हमेशा शाहरूख का साथ दिया। गौरी के साथ और शाहरूख की कड़ी मेहनत ने उन्हें आज बॉलीवुड का किंगखान बना दिया। आज दोनों बॉलीवुड के सबसे कामयाब कपल्स में शूमार हैं। शाहरूख और गौरी के तीन बच्चे आर्यन, सुहाना और अबराम हैं। शाहरूख और गौरी का रिश्ता वक्त के साथ और भी गहरा हो गया है।