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‘200 या 500 रुपये ले लो’ संक्रमण खरीदता था ये फेमस एक्टर? कारण सामने आया तो चौंके लोग

Bollywood Actor: अक्सर हमने सितारों के अलग-अलग किस्से- कहानियां सुनी है, लेकिन छिछोरे फेम एक्टर को लेकर खबर है कि वह लोगों से कहते थे कि 200 या 500 रुपये ले लो और अपना संक्रमण मुझे दे दो। इसका कारण भी सामने आया है।

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Bollywood Actor Varun Sharma did buy diseases for avoid ragging

एक्टर वरुण शर्मा को लगता था रैगिंग से डर

Bollywood Actor Varun Sharma: पर्दे पर सबको अपनी कॉमेडी से लोटपोट करने वाला वो चेहरा, जिसके एक डायलॉग पर सिनेमाघरों में तालियां गूंजती हैं, असल जिंदगी में एक ऐसी 'डील' कर रहा था जिसे सुनकर आप हैरान हो सकते हैं। क्या आपने कभी सुना है कि कोई शख्स अपनी जेब से पैसे देकर मौत जैसी बीमारी या भयंकर इन्फेक्शन खरीदता हो? कॉलेज के उन अंधेरे गलियारों में, जहां सीनियर्स का खौफ साये की तरह पीछा करता था, उस उभरते हुए सितारे ने खुद को बचाने के लिए एक ऐसी खौफनाक तरकीब निकाली जिसे कोई सामान्य इंसान सोच भी नहीं सकता। आखिर क्या वजह थी कि 'छिछोरे' का चहेता 'सेक्सा' यानी वरुण शर्मा, को लेकर खबर है कि वह दूसरों से 'बीमारी' उधार मांगते थे।

200 रुपये में 'बीमारी'खरीदते थे वरुण शर्मा (Bollywood Actor Varun Sharma Big reveales)

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, वरुण शर्मा ने खुद इसके बारे में बात की और बताया कि कॉलेज के शुरुआती दिनों में वह रैगिंग से इस कदर डरते थे कि उन्होंने इससे बचने के लिए एक बहुत ही अजीब और खतरनाक रास्ता चुना था। वरुण ने कहा, "मैं अपने ग्रुप का 'सेक्सा' नहीं बल्कि 'मम्मी' हुआ करता था। मैं रैगिंग से इतना घबराता था कि सीनियर के चंगुल से बचने के लिए दूसरे लड़कों से बीमारी खरीदा करता था।" यह सुनने में जितना अजीब है, इसकी हकीकत उतनी ही डरावनी थी।

कैसे होती थी 'बीमारी की डील'?

वरुण ने उस नायाब लेकिन जोखिम भरे तरीके का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी साथी छात्र को 'कन्जक्टिवाइटिस' (आंख आना) की बीमारी होती थी, तो वह उसके पास जाते थे। वरुण कहते हैं, "मैं उस लड़के से कहता था कि ये 200 या 500 रुपये ले और मुझे अपनी ये बीमारी दे दे।" डील पक्की होने के बाद वरुण उस बीमार लड़के की आंखों में अपनी उंगली छुआते थे और फिर उसे अपनी आंखों में मल लेते थे। कुछ ही घंटों में वरुण की आंखें भी लाल हो जाती थीं और उन्हें वही संक्रमण हो जाता था।

हॉस्पिटल का वो 4 दिन का सुकून

इतनी तकलीफ सहने के पीछे वरुण का मकसद सिर्फ एक था- अस्पताल का बेड। उन्होंने बताया कि जैसे ही उनकी आंखें खराब होती थीं, वह डॉक्टर के पास जाकर मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा लेते थे और 4-5 दिनों के लिए हॉस्पिटल में एडमिट हो जाते थे। उनका मानना था कि अस्पताल के उन चार दिनों में कम से कम कोई सीनियर आकर उनकी रैगिंग नहीं करेगा।

वहीं अधिकतर लोग इस बात से हैरान हैं कि रैगिंग का डर किसी छात्र को किस कदर मानसिक रूप से तोड़ सकता है कि वह खुद को बीमार करने तक पर उतारू हो जाए। 215 करोड़ की कमाई करने वाली 'छिछोरे' के इस सितारे की असली कहानी, पर्दे की कहानी से कहीं ज्यादा पेचीदा निकली।