13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मोहम्मद रफी को पहले ही हो गया था मौत का आभास!, कुछ ऐसे ही अनसुने किस्से

मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया था

2 min read
Google source verification

image

Mahendra Yadav

Jul 31, 2018

Mohammad rafi

Mohammad rafi

संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी फिल्म इंडस्ट्री में अपने मृदु स्वाभाव के कारण जाने जाते थे लेकिन एक बार उनकी स्वर कोकिल लता मंगेश्कर के साथ अनबन हो गई थी। मोहम्मद रफी ने लता मंगेशकर के साथ सैकड़ों गीत गाए थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब रफी ने लता से बातचीत तक करनी बंद कर दी थी। लता मंगेशकर गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं जबकि रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। रफी साहब मानते थे कि एक बार जब निर्माताओं ने गाने के पैसे दे दिए तो फिर रॉयल्टी किस बात की मांगी जाए।

विवाद इतना बढ़ गया कि बातचीत हो गई बंद:
विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे..' गीत गाया। मोहम्मद रफी ने हिन्दी फिल्मों के अलावे मराठी और तेलगू फिल्मों के लिए भी गाने गाए।

पद्मश्री और 6 बार फिल्मफेयर:
मोहम्मद रफी अपने करियर में 6 बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किये गये। वर्ष 1965 में रफी को पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। मोहम्मद रफी बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। मोहम्मद रफी फिल्म देखने के शौकीन नही थे लेकिन कभी-कभी वह फिल्म देख लिया करते थे।

यह फिल्म देखने के बाद हो गए अमिताभ के फैन:
एक बार रफी ने अमिताभ बच्चन की फिल्म 'दीवार' देखी थी। 'दीवार' देखने के बाद रफी अमिताभ के बहुत बड़े प्रशंसक बन गये। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म नसीब में रफी को अमिताभ के साथ युगल गीत 'चल चल मेरे भाई..'गाने का अवसर मिला। अमिताभ के साथ इस गीत को गाने के बाद रफी बेहद खुश हुये थे। जब रफी अपने घर पहुंचे तो उन्होंने अपने परिवार के लोगो को अपने पसंदीदा अभिनेता अमिताभ के साथ गाने की बात को खुश होते हुये बताया था। अमिताभ के अलावा रफी को शम्मी कपूर और धर्मेन्द्र की फिल्में भी बेहद पसंद आती थी। मोहम्मद रफी को अमिताभ -धर्मेन्द्र की फिल्म शोले बेहद पंसद थी और उन्होंने इसे तीन बार देखा था।

हो गया था मौत का आभास:
30 जुलाई 1980 को फिल्म 'आस पास' के गाने 'शाम क्यू उदास है दोस्त ..'गाने के पूरा करने के बाद जब रफी ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से कहा, 'शुड आई लीव' जिसे सुनकर लक्ष्मीकांत प्यारे लाल अचंभित हो गए थे क्योंकि इसके पहले रफी ने उनसे कभी इस तरह की बात नही की थी। अगले दिन 31 जुलाई 1980 को रफी को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को हीं छोड़कर चले गए।