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अगर डरना चाहते हैं तो मत रखिए विक्की कौशल की भूत से कोई भी उम्मीद, कर देगी निराश

विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की फिल्म भूत हुई रिलीज दर्शकों को नहीं डरा पाती है भूत हैलुसिनेशन और साइकोलॉजी पर बेस्ड है फिल्म

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Neha Gupta

Feb 21, 2020

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Bhoot Part One: The Haunted Ship Review: नई दिल्ली | बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों का क्रेज राम गोपाल वर्मा ने कुछ ऐसे एंगल से जोड़ा है कि दर्शक वो बार-बार देखकर शायद थक चुके हैं। विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की फिल्म भूत (Bhoot Part One: The Haunted Ship) से दर्शकों को बेहद उम्मीदें थी लेकिन लगता है कि उसपर डायरेक्टर साहब ने पानी फेर दिया है। फिल्म की शुरुआत ऐसे होती है कि आपको लगेगा कि आगे बहुत डर लगने वाला है, एक भूतिया माहौल बनाने की डायरेक्टर भानू प्रताप सिंह ने पूरी कोशिश की है लेकिन आखिरी तक आते-आते फिल्म बोझिल लगने लगती है। बॉलीवुड की जितनी भी हॉरर फिल्में बनती हैं उनमें एक चीज़ कॉमन होती है और वो है भगवान का मंत्र जाप, भूत तो भइया तभी भागेगा। तो चलिए भूत कैसे भागेगा उससे पहले की फिल्म की कहानी आपको बता देते हैं।

फिल्म भूत की कहानी है कुछ ऐसी

फिल्म भूत सच्ची घटना पर बेस्ड है तो शुरूआत में ही आपको एक डरावना सीन देखने को मिल जाएगा। कहानी है पृथ्वी (विक्की कौशल Vicky Kaushal) नाम के शख्स की जो एक शिपिंग ऑफिसर है। पृथ्वी के साथ पहले ही एक हादसे हो चुका है जिसमें वो अपनी बेटी और पत्नी को खो चुका है। दोनों की मौत का जिम्मेदार वो खुद को ही समझता है। इसीलिए पृथ्वी के दिमाग में हैलुसिनेशन की बिमारी जन्म ले लेती है। इस बीमारी में पृथ्वी को उसकी पत्नी (Bhumi Pednekar) और बेटी हर जगह दिखाई देते हैं। बीमारी को लेकर डॉक्टर उसका इलाज भी कर रहे हैं लेकिन वो दवाईयां नहीं खाना चाहता क्योंकि वो अपनी पत्नी और बेटी से मिलता रहना चाहता है। इस बात को लेकर उसका दोस्त रियाज उसे समझाता है कि वो जो कर रहा है वो गलत है। फिर एक दिन अचानक एक सुनसान जगह पर समुद्र किनारे सी-बर्ड जहाज खड़ा मिलता है जिसमें कोई नहीं है। मुंबई में इस जहाज के आने से खलबली मच जाती है जिसके बाद उसको हटाने की जिम्मेदारी पृथ्वी की कंपनी को दी जाती है। यहीं से शुरु होता है एक नया हॉरर जिसमें विक्की का साथ देते हैं प्रोफेसर बने आशुतोष राणा। जहाज में जाने के बाद विक्की को कुछ अजीब सी चीजे दिखाई देती हैं लेकिन वो किसी को बता नहीं पाता क्योंकि उसका हैलुसिनेशन का इलाज चल रहा है। जहाज में फंसी होती है आत्मा जिसके इर्द-गिर्द पूरी फिल्म घूमती है। फिल्म में भूत का क्या विक्की कौशल से कोई कनेक्शन है क्या विक्की कौशल को भूत मार देता है या वो उसे भगा पाते हैं? अगर भूत को भगाते हैं तो कैसे भगाते हैं? हॉन्टेड शिप से लोगों की जान क्यों जान जा रही है? इन सब बातों के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

कलाकारों की एक्टिंग और स्क्रीनप्ले

विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की एक्टिंग की बात करें तो उन्होंने अपने कैरेक्टर के साथ पूरा न्याय किया है। कहा जाए कि पूरी फिल्म उन्ही के कंधों पर थी तो गलत नहीं होगा। जहाज और विक्की कौशल के आसपास ही फिल्म बुनी गई है। आशुतोष राणा का रोल क्यों लिखा गया है, ना के बराबर उन्हें स्पेस क्यों दी गई है इस सवाल का जवाब डायरेक्टर ही दे सकते हैं। भूमि पेडनेकर का फिल्म में कैमियो है जिसमें उन्होंने अच्छा काम किया है।फिल्म का स्क्रीनप्ले ठीक है। इसके साथ जो हॉरर फिल्मों के लिए सबसे जरूरी होता है वो है ग्राफिक्स, बैकग्राउंड स्कोर और मेकअप जिसमें अच्छा काम किया है। वहीं फिल्म में कई सीन्स ऐसे हैं जो रिपिट किए जा रहे हैं ऐसा महसूस होता है। कहानी नई है लेकिन कॉन्सेप्ट वही पुराना रखा गया है जिसकी वजह से दर्शकों का शायद कुछ नयापन देखने को ना मिल पाए। पत्रिका की तरफ से फिल्म भूत को ढाई स्टार दिए जाते हैं।

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