
gazal dhaliwal
स्क्रीनप्ले राइटर गजल धालीवाल ने फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' की कहानी लिखी थी। बता दें कि इस फिल्म में दो लड़कियों के बीच की प्रेम कहानी को दिखाया गया है। लेखिका गजल खुद भी एक ट्रांसवुमेन हैं। उनका कहना है कि जब तक वह कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व और सपने देखने वाले कई लोगों को प्रेरित करती हैं, वे अपनी जेंडर पहचान को लेकर संतुष्ट हैं।
हाल में एक इंटरव्यू में गजल से पूछा कि जब लोग आपके काम की अपेक्षा आपकी सेक्सुअलिटी को हाइलाइट करते हैं तो इससे परेशानी होती है? इस पर उन्होंने कहा, इस सवाल का जवाब हां या फिर नहीं हो सकता है। प्रोफेशनल दुनिया में, मैं चाहती हूं कि मैं एक ट्रांसवुमेन के बजाय अपने काम के लिए जानी जाऊं। मेरा जेंडर मेरी आइडेंटिटी नहीं हो सकती है जबकि मैं ऐसी कहानी लिख रही हूं जिसमें कोई जेंडर नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा, 'हमारे समुदाय को रिप्रेजेंट करने वालों की कमी है जो महत्वपूर्ण है। जब मैं यंग थी और अकेली थी तो मुझे घुटन महसूस होती थी क्योंकि मेरे आस-पास कोई भी नहीं समझता था कि मैं क्या कर रही थी। इंटरनेट पर सर्च करने पर मुझे दो ट्रांसवुमेन महिलाएं मिलीं जो अमरीका में रहती थीं। उनके संपर्क में आकर जाना कि वहां पर मेरे जैसे कई लोग हैं और मैं अलग नहीं हूं। छोटे शहरों और गांवों में युवा लोग हमें देखते हैं क्योंकि वे हमें अपने प्रतिनिधि के रूप में देखते हैं।
साथ ही उन्होंने बताया, 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' की कहानी मैंने नहीं लिखी थी लेकिन उसके डायलॉग लिखे थे। मैंने फिल्म के फीमेल कैरेक्टर्स के साथ जुड़ाव महसूस किया क्योंकि वे पुरुष प्रधान समाज के बनाए नियमों के अंदर घुट रहे थे। मैंने भी पिछले 25 साल तक घुटन महसूस किया क्योंकि मैं एक पुरुष के शरीर में फंसी हुई एक महिला थी।'
Published on:
07 Jun 2019 12:04 pm

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