
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) लागू होने के बाद यह पहला आम बजट है जिसे वित्त मंत्री अरुण जेटली पेश करेंगे। सत्र 2018-2019 के लिए पेश होने वाला यह बजट मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट होगा।
अप्रैल 1860 में पेश हुआ था पहला बजट
भारत में इस आधुनिक बजट प्रणाली की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 7 अप्रैल 1860 को हुई। वायसराय परिषद के एक सदस्य थे जिन्होंने पहली बार भारत का बजट पेश किया था। उनका नाम जेम्स विल्सन था। हालांकि उनका दर्जा वित्त मंत्री का नहीं था वो बस वित्त मामले देखते थे। लेकिन उन्होंने ही सात अप्रैल 1860 को बजट भाषण दिया और पहली बार ‘इंग्लिश मॉडल’ पर भारत के लिए बजट पेश किया। पहला बजट पेश करने के चलते कुछ लोग उन्हें भारत के पहले वित्त मंत्री की संज्ञा भी देते हैं। बता दें उस वक्त भारत के शासन की बागडोर ब्रिटिश शासन के हाथों आ गई थी, जोकि 1857 की क्रांति से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ में थी। भारत पर शासन करने के लिए ब्रिटिश सरकार एक वायसराय नियुक्त करती थी। बता दें वायसराय उनकी एक परामर्श परिषद थी जिसकी सलाह पर वह निर्णय लेते थे।
कोई वित्त मंत्री नहीं ये थे जेम्स विल्सन
जेम्स विल्सन स्कॉटलैंड में जन्मे थे और पेशे से पत्रकार, व्यवसायी, स्कॉलर और राजनेता थे। 1859 में वो पहली बार भारत पहुंचे। जेम्स विल्सन इंडिया काउंसिल में आने से पहले टोपी बेचने का कारोबार करते थे। यह उनका खानदानी कारोबार था। लेकिन यहां आने के अगले साल ही उन्होंने बजट पेश किया और कुछ समय बाद बीमारी के कारण कोलकाता में उनकी मृत्यु हो गई। भले ही भारत में वो कुछ ही समय के लिए रहे लेकिन इस छोटे से ही कार्यकाल में उन्होंने भारत में बजट की परंपरा की नींव जरूर डाल दी। यही नहीं दुनिया उन्हें 'द इकोनॉमिस्ट के संस्थापक के तौर पर भी जानती है। आर्थिक मोर्चे पर उन्हें विशेषज्ञता हासिल थी।
आजादी के बाद बजट प्रणाली में बदलाव
भारत की आजादी के बाद देश का पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ। उस समय देश के प्रथम वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने संसद में यह बजट पेश किया था। बताया जाता है कि देश आजाद होने के बाद सरकार ने बजट में कई तरफ के सुधार किए और 1950 में विकास की राह पर कदम बढ़ाते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत की। यही नहीं इसी वर्ष योजना आयोग की स्थापना भी हुई थी जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री बनाया गया। उसी दौरान ही राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय संसाधनों के बटंवारे का भी फैसला लिया गया।
निति आयोग का गठन और पुरानी योजनाओं का समापन
हालांकि मौजूदा सरकार ने एक जनवरी 2015 को उक्त योजना आयोग को खत्म कर इसकी जगह नीति आयोग का गठन किया है। इसके साथ-साथ इस सरकार ने पंचवर्षीय योजनाएं लागू करना भी समाप्त कर दिया। इसके खत्म होने से पहले अंतिम पंचवर्षीय योजना 12वीं पंचवर्षीय योजना थी जिसे एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 तक चलाया गया था। इसके अलावा अब बजट में व्यय को योजनागत और गैर-योजनागत के रूप में पेश करने का सिलसिला भी नहीं रहा है। बता दें कि अब व्यय राजस्व और पूंजीगत खाते के रूप में दर्ज किया जाने लगा है।
Updated on:
01 Feb 2018 09:39 am
Published on:
27 Jan 2018 04:02 pm
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