
नई दिल्ली। एक फरवरी को पेश होने वाले बजट से आम आदमी के साथ साथ कई सारे सेक्टर्स को काफी उम्मीदें हैं। वहीं शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे है इस बार के बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगाने का प्रस्ताव आ सकता है। अभी फिलहाल एक साल से कम समय में शेयर बेचने पर 15 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना होता है। लेकिन एक साल के बाद शेयर बेचने पर कोई टैक्स देनदारी नहीं होती है।
क्या कहते हैं आंकड़ें
आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो ज्यादातर बजट के बाद शेयर मार्केट में उछाल देखा गया है। हालांकि कुछ सालों में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट भी रही है। आंकड़ों के मुताबिक 9 बार पेश किए गए बजट के बाद 6 बार बाजार में तेजी रही है। जबकि 3 बार गिरावट दर्ज की गई है।
कैपिटल गेंस टैक्स का क्या होगा असर
मौजूदा दौर में सरकार शेयर ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स लगाती है। लेकिन अगर बजट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स का प्रस्ताव पास हो जाता है तो 1 साल बाद शेयर बेचने पर एलटीसीजी टैक्स देना होगा। अभी 1 साल से कम समय में शेयर बेचने पर 15 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना होता है। सरकार इस टैक्स को इसलिए लगा सकती है क्योंकि सरकार की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं है। हाल ही में बीएसई ने कहा था कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में छूट से सरकार को 49 हजार करोड़ का घाटा हो रहा है।
कहां है कितना टैक्स
दुनिया भर में कैपिटल गेंस टैक्स का ढांचा अलग-अलग है। चीन, थाईलैंड और सिंगापुर में कैपिटल गेंस टैक्स पर पूरी तरह से छूट है। जबकि अमेरिका कनाडा औऱ ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह टैक्स 10 से लेकर 45 फीसदी तक है। ब्रिटेन और जर्मनी में 10 से 25 फीसदी तक का कैपिटल गेंस टैक्स वसूला जाता है।
Published on:
31 Jan 2018 02:36 pm
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