17 हजार फुट से रॉकेट दागे लेकिन इसी बीच उनके प्लेन के इंजन में खराबी हो गई। MIG 27 क्रैश हो गया।जिसके बाद पाकिस्तान आर्मी ने उन्हें अपनी कैद में ले लिया।
Vijay Diwas 2020 : नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा ही तनाव का माहौल रहा है। दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध भी हो चुका है लेकि हर पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने एलओसी में अपने लड़ाकू विमान से घुसपैठ की कोशिश की जिसे भारतीय वायु सेना ने नाकाम कर दिया। इस दौरान भारतीय वायुसेना के एक मिग विमान का नुकसान हो गया। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत का एक पायलट लापता है। बाद में उसके पाकिस्तान में बंधक बनाए जाने की सूचना मिली। पाक आर्मी की कैद इस पायलट को भारत वापस लाने के लिए पाकिस्तानी पोस्ट पर हवाई हमला करते वक्त 26 वर्षीय पायलट नचिकेता का फाइटर प्लेन बंद हो गया था। इसके बाद वह पाकिस्तान के इलाके में जा गिरा था। पाक आर्मी ने उन्हें कैद में ले लिया था।
17 हजार फुट पर प्लेन हुआ खराब
3 जून, 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान IAF के फाइटर पायलट के नचिकेता को 'ऑपरेशन सफेद सागर' में MIG 27 उड़ाने का काम दिया गया। जहां उन्होंने 17 हजार फुट से रॉकेट दागे लेकिन इसी बीच उनके प्लेन के इंजन में खराबी हो गई। उसी वक्त इंजन में से आग निकलने लगी। हवा में ही प्लेन ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त उनके लिए इंजन को चालू करना जरूरी था। बाद में MIG 27 क्रैश हो गया। जिसके बाद पाकिस्तान आर्मी ने उन्हें अपनी कैद में ले लिया।
मानसिक और शारीरिक रूप से किया टॉर्चर
अपने के बारे में बात करते हुए नचिकेता ने कहा था कि टॉर्चर काफी बुरा था। उस वक्त मुझे लगने लगा था कि मौत बहुत आसान है। टॉर्चर का आखिरी पार्ट थर्ड डिग्री होता है लेकिन मेरी खुशकिस्मती थी कि मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। पाकिस्तान आर्मी के जवान उनको मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर करते थे। उन्हें मारते-पीटते थे। नचिकेता ने बताया कि वह मुझे बुरी तरह से पीटते थे। साथ ही उनकी कोशिश रहती थी कि भारतीय सेना के बारे में जानकारी दूं।
तत्कालीन राष्ट्रपति और अटल बिहारी वाजपेयी ने किया स्वागत
रिपोर्ट के अनुसार नचिकेता की रिहाई में पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी पार्थसारथी का हाथ था। उन्होंने ही रिहाई की बातचीत की थी। नियम के अनुसार, पाकिस्तान की गिरफ्त में आए नचिकेता को 8 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया था। जहां पाकिस्तान से नचिकेता को भारत को सौंप दिया था। जिसके बाद वह वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे। जहां तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनका स्वागत किया।