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मिसाल: यूपी की इस एसडीएम ने बदल दी सरकारी स्‍कूल की तस्‍वीर, खुद लेती हैं क्‍लास

स्कूल की क्लासों में लगी हुई हैं टाइल्स लगी हुई, शौचालय भी किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के शौचालयों से कम नहीं

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bulandshahar

राहुल गोयल, बुलंदशहर। प्रतिदिन गिरती शिक्षा व्यवस्था और प्राथमिक विद्यालयों की बदहाल तस्वीरें तो आए दिन सामने आती रहती हैं, लेकिन बुलंदशहर की सिकंद्राबाद एसडीएम की लगन और मेहनत सरकारी स्कूलों के लिए वरदान साबित हुई है। सिकंद्रबाद एसडीएम शुभी सिंह काकन ने सरकारी स्कूलों को गोद लेने के बाद उनकी शक्ल ही नहीं सूरत तक बदल डाली है। सिकंद्राबाद के सरकारी स्कूल न होकर अब मॉडल स्कूल हो गए हैं।

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क्‍लासों में लगी हैं टाइल्‍स

सिकंद्राबाद के हसनपुर जागीर में स्थित प्राथमिक विधायलय को देखकर आज हर कोई वाह-वाह कर रहा है। बता दें कि स्कूल की क्लासों में टाइल्स लगी हुई हैं, जबकि यहां बने शौचालय भी किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के शौचालयों से कम नहीं हैं। अगर इससे पहले की बात करें तो विद्यालय की छत जर्जर थी और इमारत की हालत बदहाल, लेकिन सिकंद्राबाद एसडीएम शुभीसिंह काकन की दस्तक ने स्कूल की जो तस्वीर बदली, वो आपके सामने है।

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एसडीएम ने गोद लिया था गांव

सरकार के लाख दावों के बाद भी यूपी के प्राथमिक विद्यालयों की हालत और प्रतिदिन शिक्षा का गिरता स्तर किसी से छुपा नहीं है। शायद यही बात एसडीएम सिकंद्राबाद को गंवारा नहीं थी, तभी तो उन्‍होंने सिकंद्राबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित उन विद्यालयों को गोद ले लिया। इनमें मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा था। एसडीएम के इस कदम की जहां बुलंदशहर में सराहना की जा रही है, तो वहीं एसडीएम के इस सपने को साकार करने के लिए कई सामाजिक संगठनों ने भी हाथ आगे बढ़ाए।

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खुद लेती हैं क्‍लास

एसडीएम ने सरकारी प्राथमिक विद्यालय की जर्जर हालत देखी तो पहले उन्हें गुस्सा आया और फिर स्कूल की हालत बदलने का जिम्मा उठा लिया। इसके लिए उन्होंने सामाजिक संगठनों को आगे आने की अपील की। एसडीएम ने सामाजिक संगठन की मदत से इमारत का पुनः निर्माण शुरू करा दिया। वहीं, हर सप्ताह विद्यालय पहुंचकर एसडीएम शुभी सिंह काकन बच्चों की खुद क्लास भी लेती हैं।

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व्‍यापारियों का लिया जा रहा सहयोग

शुभी सिंह काकन ने बताया, सिकंद्राबाद के सरकारी स्कूल को गोद लेकर उनका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। साथ ही परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा को गुणवत्ता युक्त बनाने के लिए स्थानीय व्यापारियों का सहयोग लिया जा रहा है। बात रही मेरे द्वारा बच्चों को पढ़ाने की तो बच्चों की क्लास ले कर उनकी शिक्षा की गुणवत्ता की परख करती हूं। साथ ही सप्ताह के एक दिन बच्चों की क्लास लेने जाती हूं।

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