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यूपी के इस जिले में गौमूत्र की कीमत मिनरल वाटर से भी ज्यादा, जानें ऐसा क्यों हो रहा है

Bulandshahr news: बुलंदशहर के गांव नरसेना में गौमूत्र की कीमत मिनरल वाटर से भी ज्यादा हो गई है। इससे किसानों को बड़ा फायदा मिल रहा है।

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Bulandshahr News: बुलंदशहर में तहसील स्याना के गांव नरसेना के किसानों की आमदनी पिछले कुछ समय से बढ़ गई है। जिस रेट पर कंपनी वाले दुकानदारों को मिनरल वाटर देते हैं, उसे कई गुना ज्यादा रेट पर किसान गौमूत्र बेच रहा हैं। गौ पालन करने वाले किसान 10 से 15 रुपए प्रति लीटर पर गौमूत्र बेच रहे हैं। पिछले कई सालों में यह रेट सबसे ज्यादा है, इसे किसानों को काफी मुनाफा हो रहा है। किसान बताते हैं कि इसके पीछे गांव के ही डॉ. प्रवीण कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. प्रवीण कुमार एक कृषि वैज्ञानिक है और गौमूत्र से वह ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र और कीटनाशक तैयार करते हैं। यह फर्टिलाइज़र किसान दुकानों पर 200 रुपए लीटर बेचते है जिससे उन्हें दुगना मुनाफा होता है।

गौमूत्र से तैयार किए 5 फॉर्मूले
गौमूत्र के जांच पड़ताल के बाद डॉ. प्रवीण ने अपने लैब में किसानों के लाभ की कई चीजें बनाई है। इनमें इंसेक्ट्रीसाइड और पौधे के फफूंद या फंगस रोग को दूर करने वाले फंगीसाइड, दानेदार ऑर्गेनिक सुपर वर्मी कंपोस्ट जैसे कई उत्पाद शामिल है। इससे किसानों को कम कीमत पर खाद व इंसेक्टिसाइड उपलब्ध होता है जो फसलों के लिए बहुत लाभदायक होता है।

किसानों के लिए लाभदायक बना गौमूत्र
डॉ. प्रवीण ने बताया कि, पिछले साल 10 लीटर गौमूत्र खरीदा था लेकिन इस साल गौमूत्र से बनने वाले इंसेक्टिसाइड की मांग बढ़ गई है। इसके चलते उन्होंने 50 लीटर गौमूत्र खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसान इसका प्रयोग गन्ने, धान, खीरा आदि की फसलों में मुख्य रूप से कर रहे हैं। साथ ही पत्ती खाने वाले, फल छेदन तथा तना छेदक जैसे अधिक हानि पहुंचाने वाले कीटों के प्रति इसका उपयोग अधिक लाभकारी है।

छात्र भी रिसर्च में जुटे
डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि, उत्तर प्रदेश के कई डिग्री कॉलेज के छात्र भी उनके रिसर्च सेंटर पर जांच के लिए आ रहे हैं। अब तक 50 से ज्यादा छात्र रिसर्च में हिस्सा ले चुके हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र भी कीटनाशक खरीद कर किसानों की मदद के लिए आगे आया है।

नौकरी छोड़ गौमूत्र पर की रिसर्च
नरसेना के रहनेवाले डॉ. प्रवीण कुमार ने अपनी पढ़ाई कृषि विषय में ही पूरी की थी। उसके बाद वह एक प्राइवेट कंपनी में कृषि वैज्ञानिक के रूप में नौकरी करते थे। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने नौकरी छोड़ अपने गांव में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती रिसर्च सेंटर खोलकर रिसर्च करना शुरू कर दिया।

बता दें, डॉ. प्रवीण कुमार वर्ष 2014 से रिसर्च कर रहे हैं। उनके पास अपनी ऑर्गेनिक लैब में करीब 300 जड़ी बूटियां है, जिसमें उन्होंने अपने फॉर्मूले डेवलप किए हैं।