
बूंदी. कार्यालय
बूंदी. राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों नामांकन के अनुसार पूरे सत्र में होने वाले कार्यों के लिए बजट दिया जाता है, लेकिन इस बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के समय बजट जारी हुआ है, जिसको हर हालत में 31 मार्च तक खर्च करना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं रहेगा। नहीं तो राशि लैप्स हो जाएगी।
इधर, संस्था प्रधान व शिक्षक बजट जारी होते ही उसको स्कूलों में भेजने में जुट गए। हालांकि सर्वर की समस्या ने सभी को परेशानी में डाले रखा। परिषद की ओर से सत्र 2025-26 के लिए जारी इस कंपोजिट स्कूल ग्रांट में राज्य भर के प्रारंभिक शिक्षा के 50 हजार 318 एवं माध्यमिक शिक्षा के 18 हजार 799 स्कूलों के लिए नामांकन अनुसार कुल 118.43 करोड़ रुपए एवं 11302.300 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है, जिसमें बूंदी जिले के प्रारंभिक शिक्षा के 953 स्कूलों को 2 करोड़ 45 लाख रुपए एवं माध्यमिक शिक्षा के 303 स्कूलों को 1 करोड़ 98 लाख रुपए जारी किए गए है।
इस राशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका के 31 जनवरी अंक में सत्र खत्म होने में दो माह, स्कूलों को अब भी कंपोजिट ग्रांट का इंतजार शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद शिक्षा विभाग अंत समय में जागा ओर कंपोजिट ग्रांट राशि जारी कर दी। शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग द्धारा सरकारी स्कूलों को पूरे वित्तीय वर्ष में नामांकन के अनुसार मिलने वाली ग्रांट की राशि शिक्षा सत्र की शुरुआत यानी जुलाई माह में ही जारी करनी चाहिए, जिससे स्कूलों में आवश्यकतानुसार सामग्री खरीदी जा सके।
इन कार्यों पर खर्च करनी होगी राशि
ग्रांट का उपयोग दरी-पट्टी,बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था, स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा, स्कूल भवन की मामूली मरम्मत और अग्निशमन यंत्रों में गैस भरवाने जैसे कार्यों के लिए भी यह राशि उपयोगी होगी। साथ ही, बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने का किराया भी इसी मद से दिया जा सकेगा।
स्वच्छता पर 10 प्रतिशत खर्च अनिवार्य
शिक्षा परिषद ने साफ किया है कि राज्य के सभी स्कूलों को कुल ग्रांट का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। इसमें शौचालय की सफाई, फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, साबुन, सैनिटाइजर और कचरा पात्र जैसी वस्तुओं पर खर्च करना अनिवार्य है।
इस पर नहीं कर सकेंगे राशि का खर्च
इस राशि से स्टाफ या ऑफिस के लिए फर्नीचर, जलपान, उत्सव आयोजन या फोटोग्राफी पर खर्च नहीं कर सकेंगे। यदि बजट का दुरुपयोग पाया गया, तो संस्था प्रधान के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर राशि की वसूली की जाएगी।
नामांकन के अनुसार स्कूलों को बजट
1 से 30 नामांकन 266 स्कूलों को प्रति स्कूल 10 हजार रुपए
31 से 100 नामांकन 502 स्कूलों को प्रति स्कूल 25 हजार रुपए
101 से 250 नामांकन 182 स्कूलों को प्रति स्कूल 50 हजार रुपए।
250 से 1000 नामांकन वाले एक स्कूल स्कूल 3 हजार रुपए।
1000 से अधिक नामांकन वालों स्कूलों के लिए एक लाख रुपए मिलेंगे जिसकी संख्या शून्य है।
बजट प्राप्त होते ही सीबीईओ को जारी कर दिया गया है। संबंधित पीईईओ व यूसीईओं के द्धारा पेंङ्क्षडग बिलो का शीघ्र भुगतान किया जाएगा।
दलीप सिंह गुर्जर, एडीपीसी, समग्र शिक्षा, बूंदी
Published on:
30 Mar 2026 11:51 am
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