5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

1500 यूनिट संग्रहित क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 11 यूनिट नेगेटिव

सामान्य जिला चिकित्सालय स्थित बूंदी के ब्लड बैंक में नेगेटिव ब्लड की कमी दूर नहीं हो रही। जी हां! 1500 यूनिट संग्रहित करने की क्षमता वाले ब्लड बैंक में नेगेटिव ब्लड की मात्रा केवल सिर्फ 11 यूनिट ही रह गई।

2 min read
Google source verification

बूंदी

image

pankaj joshi

Jun 23, 2020

1500 यूनिट संग्रहित क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 11 यूनिट नेगेटिव

1500 यूनिट संग्रहित क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 11 यूनिट नेगेटिव

1500 यूनिट संग्रहित क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 11 यूनिट नेगेटिव
नेगेटिव ब्लड की कमी से जूझ रहा बूंदी का ब्लड बैंक, वर्तमान में ‘ए’ पॉजिटिव व ‘बी’ पॉजिटिव गु्रप के रक्त की बढ़ी मांग
थैलिसीमिया के मरीजों के सामने हुई परेशानी
बूंदी. सामान्य जिला चिकित्सालय स्थित बूंदी के ब्लड बैंक में नेगेटिव ब्लड की कमी दूर नहीं हो रही। जी हां! 1500 यूनिट संग्रहित करने की क्षमता वाले ब्लड बैंक में नेगेटिव ब्लड की मात्रा केवल सिर्फ 11 यूनिट ही रह गई। यह आपात स्थिति के लिए ठीक नहीं। कैंसर, थैलिसीमिया व डायलिसिस पीडि़तों के रक्त के लिए ब्लड बैंक व्यवस्था नहीं कर पाता। जबकि इन्हें खून देना आवश्यकता बताया। परेशानी का कारण नेगेटिव रक्त की कमी बताया। यह पहला अवसर नहीं जब खून की कमी हुई। ऐसे में अब ठोस योजना बनाने की आवश्यकता आन पड़ी। वर्तमान में ब्लड बैंक में 96 यूनिट रक्त संग्रहित बताया। इस समय ब्लड बैंक में ‘ए’ व ‘बी’ पॉजिटिव गु्रप के रक्त की मांग ज्यादा बताई।
बीते पांच दिनों में ही इस गु्रप के रक्त की मांग बढ़ गई। बी-नेगेटिव, ओ-नेगेटिव, ए-पॉजिटिव व बी-पॉजिटिव जैसे ब्लड गु्रप में एक-एक या दो यूनिट ही रक्त रह गया।
ब्लड बैंक सूत्रों की माने तो इन गु्रप के रक्तदान के लिए रक्त जरूरी हो गया। अस्पताल में सडक़ दुर्घटनाओं, ऑपरेशन में खून की कमी वाले मरीजों को चढ़ाने के लिए नेगेटिव रक्त की आपूर्ति इसी ब्लड बैंक से की जाती है। जनाना व प्राइवेट अस्पताल में जरूरत पडऩे पर भी यही से रक्त ले जाया जाता है।
इस लिए बढ़ रही जरूरत
ब्लड बैंक सूत्रों के अनुसार मार्च, अप्रेल मई और जून माह में खून की अधिक जरूरत पड़ती है। इन महिनों में गर्मी के चलते ए व बी गु्रप के रक्त की आवश्कता अधिक पड़ती है। जबकि जुलाई में रक्त की जरूरत कम हो जाती है। फिर से अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर में रक्त की आवश्यकता बढ़ती है। इन महिनों में मौसमी बीमारियों के बढऩे के साथ ही मलेरिया का सीजन भी शुरू हो जाता है।
रक्तदान से नहीं सेहत को नुकसान
चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी। रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता। बल्कि किसी को जीवनदान जरूर मिलेगा। सभी स्वस्थ लोगों को रक्तदान के अवसर तलाशने चाहिए। 18 से 60 वर्ष की उम्र तक के लोग आगे होकर रक्तदान करें। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं को भी पहल करनी चाहिए। जनप्रतिनिधि भी विशेष आयोजनों पर रक्तदान को अधिक महत्व दें।
क्षमता का आधा भी नहीं, कम्पोनेट यूनिट नहीं चालू
ब्लड बैंक में वर्तमान में क्षमता का नाम मात्र ब्लड भी उपलब्ध नहीं रहा। इसकी स्टोरेज क्षमता 1500 यूनिट बताई, लेकिन वर्तमान में 92 यूनिट रह गया। इसमें भी नेगेटिव ब्लड के साथ ए व बी पॉजिटिव रक्त की कमी पेरशानी का कारण बन गई। जबकि खपत प्रतिदिन 40 यूनिट रक्त की हो गई।
थैलिसीमिया पीडि़तों को हर रोज चाहिए खून
थैलिसीमिया एक रोग होता है, जो 1 से 20 साल तक के बच्चों में होता है। इसमें रक्त की हरदम जरूरत पड़ती है।
‘नेगेटिव रक्त की कमी है, लेकिन वर्तमान में ए व बी पॉजिटिव गु्रप के रक्त की मांग भी बढ़ी है। इस गु्रप का रक्त लेने में परेशानी हो रही है। पिछले पांच दिनों से ब्लड बैंक में इसके मरीज आ रहे हैं। वहीं थैलिसीमिया के मरीजों को भी रक्त की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रामदयाल शर्मा, ब्लड बैंक प्रभारी, सामान्य चिकित्सालय, बूंदी