17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चंद्रभागा नदी खो रही अस्तित्व, नालियों का गंदा पानी मिलने से फैल रही सड़ांध

प्रदेशभर में चल रहे लॉकडाउन में जहां कई बड़ी नदियां साफ हो गई, वहीं हिण्डोली क्षेत्र की चंद्रभागा नदी का पानी अब भी सडांध मार रहा है। नदी जंगल से अटी होने से अस्तित्व ही खतरे में आ रहा है।

less than 1 minute read
Google source verification

बूंदी

image

pankaj joshi

Apr 19, 2020

चंद्रभागा नदी खो रही अस्तित्व, नालियों का गंदा पानी मिलने से फैल रही सड़ांध

चंद्रभागा नदी खो रही अस्तित्व, नालियों का गंदा पानी मिलने से फैल रही सड़ांध

चंद्रभागा नदी खो रही अस्तित्व, नालियों का गंदा पानी मिलने से फैल रही सड़ांध
हिण्डोली. प्रदेशभर में चल रहे लॉकडाउन में जहां कई बड़ी नदियां साफ हो गई, वहीं हिण्डोली क्षेत्र की चंद्रभागा नदी का पानी अब भी सडांध मार रहा है। नदी जंगल से अटी होने से अस्तित्व ही खतरे में आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मार्कंडेय ऋषि के तपोभूमि देवझर महादेव से बहने वाली चंद्रभागा नदी का प्राचीन महत्व है। सौ फीट चौड़ाई में बहने वाली नदी अब 30 से 40 फीट गई। अरावली पर्वत माला से बहने वाली नदी सथूर के निकट हर की पेड़ी तक साफ है। उसके बाद नदी में गांव व आसपास के मजरों का गंदा पानी नालियों आता है। जिससे पानी सड़ांध मारने लग गया। नदी के भीतर जगह-जगह जंगल उग आया। जिससे पानी का बहाव भी थम गया।
माताजी मंदिर के पास घाट पर सैकड़ों लोग नहाया करते थे। जो अब पानी दूषित होने से बंद हो गया। नदी बडौदिया, धनावा होती हुई सियाणा के पास मेज नदी में मिलती है। बुजुर्गों ने बताया कि चंद्रभागा नदी का धार्मिक महत्व था। लोग यहां अस्थियां विसर्जन करने आते थे। अब नदी की स्थिति काफी दयनीय हो गई।
चंद्रभागा नदी की सफाई व यहां पर ड्रम सिस्टम की पुलिया बनाने के पंचायत समिति को प्रस्ताव भिजवाए जाएंगे।
सोनिया सैनी, सरपंच, सथूर
राज्य सरकार व जिला प्रशासन से नदी को पुनर्जीवित करवाने के लिए सिल्ट हटाने व जंगल सफाई की मांग की जाएगी।
राधेश्याम गुप्ता, सरपंच, बड़ौदिया