10 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अरमानों पर फिरा पानी, सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न

क्षेत्र में किसानों ने इस बार अच्छे मुनाफे की उम्मीद से फसलें बोई थी, लेकिन अतिवृष्टि ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। पहले की बारिश में ही किसानों ने खेतों में सोयाबीन, उड़द की बुवाई की थी।

2 min read
Google source verification
अरमानों पर फिरा पानी, सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न

अरमानों पर फिरा पानी, सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न

नोताडा. क्षेत्र में किसानों ने इस बार अच्छे मुनाफे की उम्मीद से फसलें बोई थी, लेकिन अतिवृष्टि ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। पहले की बारिश में ही किसानों ने खेतों में सोयाबीन, उड़द की बुवाई की थी।
अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, लेकिन 18 व 19 जुलाई को हुई लगातार ग्यारह घंटे की बारिश में खेत जलमग्न हो गया। किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। खेतों में भरे पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं हुई। इसके बाद फिर 26 व 27 जुलाई को फिर तेज बारिश हुई, जिसने काश्तकारों के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया।
लाखेरी ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष रामसिंह चौधरी, किसान कमल मीणा, देईखेड़ा के ओमप्रकाश जुंडवाल, कोटडी के रमेश गुर्जर, रैबारपुरा के वार्डपंच देवकीनंदन शर्मा ने बताया कि खेतों में ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से यह हालात पैदा हो गए। नोताडा देईखेडा के रास्ते व मालिकपुरा, रघुनाथपुरा के खेतों में ड्रेनेज सिस्टम के अभाव में खेत पानी से लबालब हो गए। देवनारायण बाग से ऊपर के खेतों में एक तरफ सडक़, ऊपर की तरफ रेलवे लाइन और साइड में नहरें बनी होने से खेतों ने तलाइयों का रूप ले लिया।

2019 में विधायक ने भी देखे थे हाल
देवनारायण बाग के ऊपर के खेतों में वर्ष 2019 में भी पानी भरा था, तब क्षेत्रीय विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने हालात देखे थे। तब उन्होंने समाधान का भरोसा दिया था। लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखे
देईखेडा सरपंच राजकुमार मीणा, नोताडा सरपंच रामदेव पहाडिय़ा, गोहाटा सरपंच सुनिल मीणा, घाट का बराना सरपंच कृष्ण मुरारी मीणा ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को पत्र भेजा और किसानों की इस परेशानी को दूर करने की मांग की। इस मामले में केशवरायपाटन प्रधान वीरेन्द्र सिंह हाड़ा ने भी मुख्यमंत्री को
पत्र लिखा।

इन पंचायतों की फसलें जलमग्न
क्षेत्र में दो बार हुई बारिश से नोताड़ा, देईखेड़ा, रैबारपुरा, घाट का बराना, आजन्दा, गोहाटा गांवों की फसलें जलमग्न हो गई।