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Bundi : मस्टरोल जारी, भुगतान नहीं, मनरेगा श्रमिकों की जेब खाली

राज्य सरकार की शहरी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने वाली योजना के तहत कार्य कर रहे श्रमिकों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। हर पखवाड़े नई मस्टरोल जारी होने के बावजूद लाखों रुपए बकाया हैं और श्रमिक भुगतान के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के चक्कर काट रहे हैं।

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बूंदी. पौधरोपण करते मनरेगा श्रमिक। (पत्रिका फोटो)

बूंदी. राज्य सरकार की ओर से शहरी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए मनरेगा के तहत कार्य करवाए जा रहे है। हर पखवाड़े में नई मस्टरोल भी जारी की जा रही है, लेकिन इन श्रमिकों को भुगतान करने के मामले में सभी अधिकारी कर्मचारी चुप्पी साधे हुए है। श्रमिकों द्वारा प्रदर्शन करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जानकारी अनुसार नगरपरिषद क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए श्रमिकों को विभिन्न क्षेत्र में काम करवाए जा रहे है। हर पखवाड़े में मस्टरोल भी जारी की जा रही है, लेकिन लाखों रुपए बकाया होने के बाद भी अब तक किसी भी श्रमिक को भुगतान नहीं किया जा रहा है, जबकि श्रमिक कई बार अधिकारियों व कर्मचारियों का दरवाजा खटखटा चुके है।

नगरपरिषद शहरी क्षेत्र में एक मई 2025 से अब तक 326 मस्टरोल जारी हुई है, जिसमें 3260 श्रमिकों को रोजगार मिला है। इसमें से कई श्रमिक ऐसे है, जिन्होंने भुगतान की आस में कई मस्टरोल में काम भी किया है। जानकारी अनुसार इन मस्टरोल पर कुल 61 लाख 38 हजार 650 रुपए बकाया हो गए है। सितम्बर व नवम्बर 2025 में तो मात्र एक-एक मस्टरोल में काम करवाया गया है।

कर चुके है धरना प्रदर्शन

भुगतान की मांग को लेकर विगत माह में श्रमिकों ने रैली निकाल कर कलक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया था। वहीं श्रमिकों व मेट ने जिला कलक्टर को भुगतान की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा था, जिस पर कलक्टर ने एक पखवाड़े में भुगतान दिलवाए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन श्रमिकों के खाते में किसी भी प्रकार की राशि नहीं आई है।

टेम्पो का भाड़ा भी नहीं देते

श्रमिकों ने बताया कि कई बार सुबह निर्धारित स्थल पर जाने के बाद भी सरकारी कार्यक्रम होने पर कार्य स्थल बदल देते है, ऐसे में वहां पहुंचने का भाड़ा भी जेब से वहन करना पड़ता है।

अधिकारी सुनते ही नहीं

मनरेगा श्रमिक पार्वति बाई ने बताया कि गत वर्ष मई व जून में किए गए कार्य का अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। मेट से पूछने पर उनके पास कोई जवाब नहीं मिलता है, वहीं कितना मिलेगा यह भी कोई
नहीं बताता है।

चार पखवाड़े का बाकी

मथरा बाई ने बताया कि चार पखवाड़ों में विभिन्न स्थलों पर कार्य कर चुकी हूं, लेकिन भुगतान के बारे में कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी वाजिब मांग पर ध्यान तक नहीं दिया।

मात्र 18 लाख रुपए मिले है, जिससे मई-जून 2025 में जारी हुई मस्टरोल का भुगतान हो सकेगा, जो एक-दो दिन में डाल दिया जाएगा। अन्य मस्टरोल के स्वायत्त शासन विभाग को डिमांड भेजी हुई है, वहां बजट आने पर ही भुगतान हो सकेंगा।
संजू, लेखाकार, लेखा शाखा, मनरेगा, नगरपरिषद बूंदी