
लसोड़े के पेड़ बन रहे गांव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया
लसोड़े के पेड़ बन रहे गांव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया
आकोदा गांव में बड़ी मात्रा में होते हैं लसोड़े
आकोदा. अचार का मौसम आए और लसोड़े के अचार का जिक्र न हो, ऐसा नहीं हो सकता। वहीं अगर हाड़ौती में रहने वाला हो और वो भी बूंदी जिले का तो आकोदा के लसोड़े की मांग स्वत: ही बढ़ जाती है। आकोदा गांव के लोगों के लिए लसोड़े के पेड़ अतिरिक्त आय का जरिया बने हुए हैं। किसान लसोड़े बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
यहां होते हैं प्रमुखता से
क्षेत्र के किसान इन दिनों लसोड़ा के पेड़ों से फल तोडऩे में व्यस्त हैं। लसोड़े के पेड़ इन दिनों किसानों का अतिरिक्त इनकम का साधन बन रहा है। लसोड़ा क्षेत्र के आकोदा ठिकरदा, धनावा, रामचंद्रजी का खेड़ा आदि गांव में प्रमुखता से पाया जाता है। पहले इसके पेड़ बहुत कम देखने को मिलते थे, लेकिन आजकल यह किसानों की आय का स्रोत बन गया हैं। इसका पेड़ सामान्यता 5-7 साल में अपनी पैदावार देने लग जाता है जो 30-40 साल तक पैदावार देता है। इसके एक पेड़ से एक क्विंटल तक फल प्राप्त हो जाते हैं।
यह है उपयोग
इसके फल का प्रयोग अचार बनाने में किया जाता है। इसके आचार की मांग दिनों दिन बाजार में काफी बढ़ रही है। इसलिए लसोड़े बाजार में अच्छे दाम पर बिकते हैं। इस पेड़ की छाल से रस्सी भी बनाई जाती हैं। जिसका उपयोग नाव के छिद्र बंद करने के काम में लेते हैं।
यह कहते हैं किसान
लसोड़े की खेती बहुत मुनाफे की खेती है। इससे किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकता हैं। मेरे 10 पेड़ हैं। जिससे सलाना एक लाख तक आय प्राप्त होती है।
मुकेश सैनी, ठिकरदा
लसोड़े के पेड़ों को खेतों की मेड पर व बंजर भूमि पर लगाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
भंवर लाल सैनी, ठिकरदा
Published on:
26 May 2021 09:00 pm
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