
यहां का एक किला ऐसा है, जो बिना चुनाई के केवल पत्थरों से बना है...यह भी है खासियत चूना रेत, मिट्टी का नहीं किया उपयोग
यहां का एक किला ऐसा है, जो बिना चुनाई के केवल पत्थरों से बना है...यह भी है खासियत चूना रेत, मिट्टी का नहीं किया उपयोग
बड़ाखेड़ा. लाखेरी-बूंदी सडक़ मार्ग पर उतराना के पास सडक़ से 2 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी पर एक प्राचीन किला है, जो देखरेख के अभाव में खण्डर हो गया है। उतराना गांव का यह किला लाइमस्टोन से निर्मित है। यही बात इसे दूसरे किलों से अलग करती है। किला किसने बनाया, यहां के शासक कौन थे, यह सब अज्ञात है, लेकिन आजादी से पहले उतराना गांव बड़ाखेड़ा रियासत का हिस्सा था। सडक़ से यह किला केवल पत्थर का टीला नजर आता है। विशाल बुर्ज ही लोगों को आकर्षित करती है। किले के आसपास छोटी छोटी पहाडिय़ां ही इसको सुरक्षा देती है। बुर्ज से लेकर परकोटे के अन्दर के कमरे बनाने में खालिस पत्थरों का प्रयोग किया गया था। जिसे आम बोलचाल की भाषा में खड़ी चुनाई कहा जाता है। मौसम और वक्त के थपेड़ों ने इसे जर्जर कर दिया है। इसका विस्तार लगभग 1 किमी में फैला हुआ है। मुख्य द्वार धराशायी हो चुका है। कमरों की छत उखड़ गई है। इस प्राचीन दुर्ग को संरक्षण की दरकार है, ताकि पुरा महत्व की इस विरासत को सहेजा जा सके।
किले की जानकारी
किले में आज भी विशाल चौड़ी बुर्ज है। बुर्ज और परकोटा ही शेष बचा है। कमरे तो धराशायी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मौसम की मार और समय के बदलाव में देखरेख के अभाव में किला ढह गया।
शोध की जरूरत
दुर्ग निर्माण की शैली को देखकर हर व्यक्ति अचंभित रह जाते हैं। किला जो केवल पत्थरों से निर्मित है। जिसकी चुनाई में चूने का उपयोग नहीं किया गया। किले में वह सब मौजूद है जो दूसरे किलों में भी है। इस प्राचीन धरोहर को संरक्षण और शोध की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को भी पता चल सके इसका इतिहास क्या था और गांव का वजूद जिन्दा रह सके।
Published on:
07 Apr 2021 08:09 pm
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