
राशन सामग्री
बूंदी. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब रसोई घर में दिखने लगा है। युद्ध के चलते खाद्य सामग्रियों के दामों में वृद्धि हुई। सबसे ज्यादा असर तेल के धार में दिखी है। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट गड़बड़ाना शुरू हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि युद्ध जारी रहा तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ेगी। जबकि व्यापारियों के अनुसार गर्मी की ऋतु में सूखे मेवे के दाम अमूमन कम होते हैं, लेकिन इस बार उनकी रेट कम होने के बजाय बढ़े है। शहर के तेल व्यापारी ने बताया कि तेल के पाउच एवं बोतल भी आती हैं और यह एक, दो एवं पांच लीटर में उपलब्ध है। बढ़ती महंगाई के चलते ग्राहक अब छोटी पैङ्क्षकग कम ही ले रहे हैं। युद्ध के बढ़ते हालातों के बीच अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर किराना, सूखे मेवे एवं खाद्य तेल व्यापार पर पड़ा है।
यह दाम स्थिर
युद्ध के हालत के बीच आमजन के लिए राहत की बात ये है कि रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी खाद्य सामग्री आटा, नमक, शक्कर, मिर्ची-हल्दी, मसालों आदि के दाम स्थिर है। उनके दामों में सामान्य दिनों की तरह ही उतार-चढ़ाव है। व्यापारी के अनुसार आपूर्ति के चलते सीमित एवं आवश्यकतानुसार स्टॉक रख रहे है, ताकि अचानक मूल्य गिरावट या वृद्धि से नुकसान न हो।
सबसे ज्यादा असर तेल में दिखा
युद्ध से सबसे ज्यादा असर खाद्य तेल के दामों पर पड़ा है। खाद्य तेलों की कीमतों में करीब 20 से 25 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। खासकर सोयाबीन के तेल के दाम अधिक बढ़े हैं। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने से दाम अधिक बढ़े हैं।
सिलेंडर हुआ महंगा
रसोई गैस सिलेंडर के दाम पहले ही बढ़ गए थे। कॉमर्शियल सिलेंडर बंद होने से व्यापारी एवं उद्यमी परेशान है। वहीं रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी 50 से 60 रुपए बढ़ गए हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवार खासे प्रभावित हो रहे हैं।
इनके दाम में हुई वृद्धि
किराना व्यापारी चंचल कुमावत ने बताया कि वर्तमान में खाद्य तेलों के दामों में 20 से 25 से फीसदी इजाफा हुआ है। वहीं दालों में 8 से 12 फीसदी, सूखे मेवों में 12 से 15 फीसदी तथा हींग में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
Updated on:
04 Apr 2026 11:20 am
Published on:
04 Apr 2026 11:19 am
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