
नैनवां. नैनवां में सडक़ पर बिछी ओलों की चादर।
बूंदी. जिले में मौसम में करवट बदली और दोपहर बाद तेज अंधड़ व बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बूंदी शहर में करीब तीन बजे बारिश होने से सडक़ों पर पानी बह निकला। बाद में बादल छाए रहने से लोगों को गर्मी से राहत मिली।
नैनवां. नैनवां शहर व आसपास के गांवों में शनिवार दोपहर को दस मिनट से अधिक समय गिरे ओलों से सडक़ों, खेतों व मैदानों पर ओलों की चादर बिछ गई। नैनवां सहित आसपास के गांवों खानपुरा, टोपा, लक्ष्मीपुरा, पाई, मानपुरा, कीरो का झोपड़ा, रालड़ी, नाथड़ा, नाथड़ी, रजलावता, अरण्या, बड़ीपडाप, छोटी पडाप गांवों में भी पौने तीन बजे शुरू हुई ओलों की बरसात ने खेतों में खड़ी व कटकर पड़ी गेहूं व चने की फसलों को चौपट कर दिया। पांच दिन में ही दूसरी बार हुई ओलावृष्टि हो चुकी। दस मिनट तक ओले गिरना जारी रहा।
खानपुरा निवासी सीताराम सैनी ने बताया कि गांव में 15 मिनट से तक नींबू के आकार के ओले गिरने से गांव में सैकड़ों बीघा गेंहू की फसल चौपट हो गई। फसल काटना शुरू करते उससे पहले ही ओलों की मार ने फसलों को बर्बाद कर दिया। पास ही के टोपा व कीरो का झोपड़ा गांवों में भी फसलें चौपट हो गई।
लक्ष्मीपुरा निवासी भेरूलाल बैरवा व बनवारीलाल मीणा ने बताया कि गांव में अभी 70 प्रतिशत फसलें खेतों में खड़ी। दोपहर को हुई भीषण ओलावृष्टि से फसलें तबाह हो गई। पाई निवासी हरिराम मीणा ने बताया कि गांव में खड़ी व कटी पड़ी गेंहू की 60 से 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई। अरण्या निवासी सोभागमल मीणा ने बताया कि ओलावृष्टि से गांव में गेंहू व चने की फसलों में खराबा हुआ है। नैनवां निवासी किसान रोडूलाल जाट ने बताया कि ओलावृष्टि से 50 प्रतिशत गेहूं की फसल खराब हो गई। नाथड़ी गांव निवासी किसान महापंचायत के तहसील अध्यक्ष भरतराज मीणा ने बताया कि नाथड़ा वे नाथड़ी गांव में भी गेहूं की फसल चौपट हो गई।
पांच दिन में दूसरी बार हुई ओलावृष्टि
नैनवां उपखण्ड में पांच दिन में दूसरी बार ओलावृष्टि ने कहर मचा दिया। पांच दिन पूर्व हुई ओलावृष्टि से पहले एक दर्जन गांवों चेनपुरिया, बिजलबा, हनुवंतपुरा, सुवानिया, धीरपुर, पांडुला, धानुगांव, भावपुरा, पिपरवाला, सुन्थली, खोलाडा में गेहूं, चना व किलौंजी की फसल तबाह होने के बाद शनिवार को उपखण्ड के दूसरे गांवों में गेहूं व चने की फसल तबाह हो गई।
भण्डेड़ा. कस्बों सहित ग्रामीण क्षेत्र में दोपहर बाद अचानक मौसम हुए बदलाव के साथ ही बारिश सहित ओलावृष्टि होने से खेतों में खड़ी रबी फसलों में भी नुकसान हुआ है। बांसी, गुजरियाखेड़ा, भण्डेड़ा सहित आसपास में कुछ समय के लिए बेर के आकार के ओले भी गिरे है।
देई. क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में शनिवार को बरसात के साथ ओलावृष्टि हुई। लाम्बाबरडा निवासी जितेन्द्र सैनी ने बताया कि बरसात के साथ बेर के आकार के ओले गिरे। मोडसा पंचायत के पूर्व सरपंच मोजीराम गुर्जर ने बताया कि ओले गिरने से गेहूं,चना सरसों की फसल में नुकसान हुआ।कस्बे में हल्की बरसात से सडकें गीली हो गई। मंडी में किसानों ने अपनी ङ्क्षजसो को बचाने के लिए तिरपाल से ढका। ।
सुमेरगंजमंडी. क्षेत्र में बरसात के साथ करीब 20 मिनट तक ओले गिरे इससे किसानों की गेहूं की फसल में भारी नुकसान हुआ। गेहूं भीगने के कारण भूमिपुत्र दुखी हो गए। किसानों का कहना है कि हमें इस नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए।
तलवास. पंचायत मुख्यालय व आंतरी क्षेत्र के गांवों में शनिवार दोपहर को अचानक मौसम का मिजाज बदला। बारिश के साथ आधे घंटे तक बैर के आकार के ओले गिरे, जिससे खेत खलिहान सफेद चादर की तरहा नजर आने लगे।ओले गिरने से किसानों की गेहूं की फसलें खराब हो गई।आंतरी क्षेत्र के गांवों नीमखेड़ा, बंथली, हीरापुर, कैमला में भी ओले गिरने से किसानों को नुक्सान हुआ है।
लाखेरी. लाखेरी क्षेत्र में आधे घंटे तक तेज बारिश और ओले गिरे।सडक़ों पर चलते लोग आसरा ढूंढते नजर आए। उपखंड क्षेत्र में गेहूं और सरसों की पककर तैयार खड़ी फसल ओलों और तेज हवाओं के आगे टिक नहीं सकी। कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेज हवाओं के चलते कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा। इधर, ईंट भ_ा संचालकों के लिए भी यह मौसम भारी पड़ गया।
खटकड़. कस्बे में लगभग पांच मिनट तक बैर के आकार के ओले गिरे। किसान फसल और खुले में पड़ी उपज को लेकर चिंतित हो गए। समर्थन मूल्य पर खरीद केंद्र पर अफरा - तफरी का माहौल हो गया। क्षेत्र में गेहूं की फसल कटाई और भूसा बनाने का कार्य चल रहा है।
Published on:
05 Apr 2026 05:30 pm
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