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विधवा मां को सता रही बेटियों के भविष्य की चिंता

कोविड महामारी ने कई परिवारों को जीवनभर के जख्म दिए। इस विभीषिका में जिन्होंने अपनों को खोया उसकी भरपायी कोई भी नहीं कर सकता।

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बूंदी

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pankaj joshi

Jul 18, 2021

विधवा मां को सता रही बेटियों के भविष्य की चिंता

विधवा मां को सता रही बेटियों के भविष्य की चिंता

विधवा मां को सता रही बेटियों के भविष्य की चिंता
कोविड महामारी में कई बेटियों के सिर से पिता का साया उठा
नन्ही उम्र में अपने पिता को खो चुकी बेटियों का कौन बनें सहारा
बूंदी. कोविड महामारी ने कई परिवारों को जीवनभर के जख्म दिए। इस विभीषिका में जिन्होंने अपनों को खोया उसकी भरपायी कोई भी नहीं कर सकता।
बूंदी जिले में ही कई घरों में अपने पिता की असामयिक मृत्यु से बेसहारा हुई नन्हीं बेटियों के भविष्य की चिंता उनकी दु:खी मांओ को अभी से सताने लगी। कहते है बेटी पराया धन होती है और बड़ी होने पर बेटी का धूमधाम से विवाह कर विदा करना हर मां-बाप का सपना होता है। इसके लिए माता-पिता बचपन से ही अपनी बेटी के नाम एफडी करवाते है और अल्प बचत योजनाओं में निवेश भी शुरू कर देते हैं। लेकिन कोविड महामारी में जिन बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया और घर में बेबस विधवा मां बची उनके लिए सपना देखने वाला कोई नहीं।
तीन बेटियां, एक का तो पिता की मृत्यु के बाद हुआ जन्म
कोविड महामारी ने जो आघात दिए हैं, उससे कई घरों में तो बुरे हालात हो गए। बूंदी चिकित्सालय में तालेड़ा निवासी 31 वर्षीय धर्मराज रैगर की गत 28 अप्रेल को कोविड से असामयिक मृत्यु हो गई और पीछे 7 और तीन वर्ष की दो नन्ही बेटियों के साथ सात माह की गर्भवती पत्नी सुनीता रह गयी थी। ईश्वर की लीला देखिये पति की मृत्यु के दो माह बाद 26 जून को पत्नी सुनीता को तीसरी भी बेटी ही हुई। अब तीन बेटियों के भविष्य को लेकर दु:खी मां के पास आंसू बहाने के सिवाए कोई चारा नहीं बचा। सरकारी सहायता से कुछ गुजर बसर हो जाएगा पर बेटियों के बड़े होने पर शादी कैसे होगी अभी से यह चिंता सताने लगी। शनिवार को कांग्रेस के सहायता प्रभारी चर्मेश शर्मा को अपनी पीड़ा बताते हुए बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित दु:खी मां की आंखें भर आई।
कौन बने बेटियों का सहारा
कोविड महामारी से बूंदी के ही कई घरों में ऐसे हालात पैदा हो गए जहां बेबस विधवा मां अपनी बेटियों की चिंता में आंसू बहा रही, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह कि अपने पिता को नन्ही उम्र में खो चुकी इन बेसहारा बेटियों का सहारा कौन बनेगा। कैसे इनका पालन-पोषण होगा और बड़े होने पर किस तरह इनका विवाह हो पाएगा।
सभी मिलकर उठाए जिम्मेदारी
कांग्रेस के सहायता केंद्र प्रभारी शर्मा ने कहा कि वास्तव में ही कोविड महामारी में अपने पिता को खोने वाली बेटियों को लेकर मां की चिंता स्वाभाविक रहेगी। उनके लिये पिता की कमी तो कोई भी पूरा नहीं कर सकता, लेकिन फिर भी सभी को सामाजिक स्तर पर ऐसी बेसहारा बेटियों की जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी एक माह की आय दान करते हुए बेसहारा बेटियों के नाम उनकी विवाह की आयु तक एफडी करवानी चाहिए।