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परम्परा के तहत गुर्जर समाज ने किया पूर्वजों का तर्पण

गुर्जर समाज द्वारा शनिवार को दीपावली के दिन छांट भरकर त्यौहार की खुशी में पूर्वजों को याद किया।

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बूंदी

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pankaj joshi

Nov 17, 2020

परम्परा के तहत गुर्जर समाज ने किया पूर्वजों का तर्पण

परम्परा के तहत गुर्जर समाज ने किया पूर्वजों का तर्पण

परम्परा के तहत गुर्जर समाज ने किया पूर्वजों का तर्पण
लाखेरी . कस्बे के गुर्जर समाज द्वारा शनिवार को दीपावली के दिन छांट भरकर त्यौहार की खुशी में पूर्वजों को याद किया। दोपहर 3 बजे क्षेत्र के दर्जनों समाजबंधु नयागांव समीप मेज नदी में पहुंचे और नदी किनारे तट पर खड़े होकर घर से लाये खाद्य सामग्री को विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के बीचपूर्वजों को याद करते हुए पानी में प्रवाहित किया और जलदेवता को नमनकिया और वर्षपर्यन्त खुशहाली की कामना की। इस दौरान राधेश्याम गोचर, राजाराम गोचर, रामजीलाल गोचर,घनश्याम गोचर, मुरारी गोचर सहित बडी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
कापरेन . दीपावली पर जहां सभी लोग माता लक्ष्मी का पूजन करते है वहीं कापरेन के गुर्जर समाजजन पूर्वजों का श्राद्ध करते है।,इसे तर्पण या सांठ भरना कहते है। इसके लिए गुर्जर समाज के लोग घरों से पूजन सामग्री ले जाते है,सभी समाज के लोग विशेष प्रकार का गीत हीड़ गाते हुए नदी, तालाब व नहर के पास पहुंच जाते है।समाज बन्धु नदी, तालाब व नहर पर एकत्रित होते है,सभी लोग मिलकर पूजन,पाठ, व धूप-ध्यान देकर पूर्वजों को निमित्त करते है।
बड़ानयागांव. क्षेत्र में दीपावली के अवसर पर गुर्जर समाज के लोगों की ओर से अमावस पर अपने पूर्वजों की याद में छांट भरने की रस्म अदा की। शनिवार को सुबह समाज के लोग गोत्र वार पकवानों की थाली लेकर जलाशयों पर पहुंचे । जहां पर अपने दिवंगत पूर्वजों को धूप लगाकर जलाशयों पर पंक्ति बंध बेल पर लागकर वंश वृद्धि के लिए तर्पण किया । बड़ा नयागांव, चतरगंज, बरवास चेता, बोरखेड़ा, टहला डे रोली, कल्याणपुरा, बोरखंडी, हरिपुरा, सथूर रामी की झौपडिय़ां, रघुनाथपुरा, बहादुरपुरा , नारायणपुर, जहाज पुरिया आदि गांवों में छांट भरने की रस्म अदा की।
भण्डेड़ा. पूर्वजों को याद करने की परंपरा चलते क्षेत्र में गुर्जर समाज के लोगों द्वारा दीपावली के अवसर पर छांट भरने की रस्म अदा की गई।
तालेड़ा. गांवों में गुर्जर समाज के लोगों द्वारा लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार साठ भरने की परम्परा का आयोजित किया गया। जिसमें समाज व परिवार के लोग एक साथ एकत्रित होकर नदी या बहते हुए पानी के पास जाकर अपने पूर्वजों को खीर अन्य खाद्य सामग्री से बने भोजन से भोग लगाते हैं।
बड़ाखेड़ा. पूर्वजों को याद करने की परंपरा के चलते गुर्जर समाज के लोगों भी दीपावली के अवसर पर छांट भरने की रस्म अदा की गई गुर्जर समाज के लोग अपने पूर्वजों की याद में छांट भरते हैं तथा पानी में खड़ होकर तर्पण करते हैं छांट भरने की परंपरा एक पुश्तैनी परंपरा है छांट भरने के बाद ही समाज के लोग दिपावली की खुशियां मनाते हैं।
करवर. क्षेत्र के गांवों में गुर्जर समाज के लोगों ने सदियों से चली आ रही छांट भरने व पूजन करने की परम्परा का निर्वाह किया। दीपावली के दिन समाज के लोगों ने पूर्वजों को याद किया तथा सामूहिक रूप से जलाशयों के किनारे घास की बेल बनाकर छांट भरने की रस्म अदा की। बाद में सभी समाज के लोगों ने एक दूसरे को दीपावली की बधाई दी। इस दौरान वीर गुर्जर उत्थान समिति के मदन गुर्जर, राधेश्याम, राजू, रामजस, कालू गुर्जर आदि उपस्थित थे।
जजावर. गुर्जर समाज के लोगों द्वारा कस्बे में दीपावली पर छांट भरने की रस्म अदा की गई। गुर्जर समाज के लोग अपने पूर्वजों की याद में दीपावली के दिन बड़ी अमावस पर छांट भरते हैं तथा पानी का तर्पण करते हैं। जिसे वह पवित्र एवं पुण्य का कार्य मानते हैं। इससे जहां तालाबों, नदियों एवं अन्य जल स्त्रोतों को शुद्ध रखने की सीख मिलती हैए वहीं इस परंपरा से आपसी भाईचारा भी बढ़ता है। छांट भरने के बाद ही समाज के लोग दीपावली की खुशियां मनाई। खुशी के इस पर्व पर भी वह अपने पूर्वजों को याद करने के साथ ही पैदा हुए नए बच्चें का भी अपने ही ढंग से स्वागत सत्कार किया गया। छांट भरने के बाद नए जन्में बच्चें के जश्न में एक दूसरे को गुड बांटा गया।