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भगवान राम-सीता के विवाह का महोत्सव मनाया, भजनों पर किया नृत्य

दबलाना कस्बे में चल रही संगीतमय श्री राम कथा के चौथे दिन सोमवार को भगवान राम सीता विवाह महोत्सव मनाया गया। हनुमान मंदिर में श्री रामचरित मानस की कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा व्यास पं महेंद्र उपाध्याय द्वारा श्रीराम-सीता के विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था।

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भगवान राम-सीता के विवाह का महोत्सव मनाया, भजनों पर किया नृत्य

दबलाना में कथा का वाचन करते हुए

दबलाना. दबलाना कस्बे में चल रही संगीतमय श्री राम कथा के चौथे दिन सोमवार को भगवान राम सीता विवाह महोत्सव मनाया गया। हनुमान मंदिर में श्री रामचरित मानस की कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा व्यास पं महेंद्र उपाध्याय द्वारा श्रीराम-सीता के विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था।
राजा ने प्रतिज्ञा की कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा-महाराजा को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी लोगों ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्री राम धनुष उठा प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली, वैसे ही देवता उन पर फूलों की वर्षा करने लगे। इस दौरान राजा जनक अयोध्या के राजा दशरथ गुरु विश्वामित्र मुनि कि उपस्थिति में राम और सीता के विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई।
देवजी का थाना हुआ श्याम मय
हिण्डोली. विष्णु शरण भारद्वाज महाराज ने सोमवार को ग्राम देवजी का थाना में आयोजित भागवत कथा में कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि मेरी लगी श्याम संग प्रीत दुनियां क्या जाने भजन पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
भारद्वाज ने कहा कि व्यास पीठ से आव्हान किया कि ङ्क्षहदुओं को सनातन धर्म की रक्षा करने के लिए प्रयास करना चाहिए। शुकदेव राजा परीक्षित से कह रहे हैं, दान उसी वस्तु का करना चाहिए जो उपयोगी हो,बेकार पड़ी वस्तु का दान कभी नहीं करना चाहिए । ब्राह्मण ओर मंदिर का धन का कभी हरण नहीं करना चाहिए । उधार लिए गए धन को अवश्य ही चुकाना चाहिए।
जल संरक्षण के बारे में बताया जल को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान करने की महिमा बताई।
सनातन धर्म हमें सबके प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। कथा में सुदामा चरित्र का चित्रण करते हुए व्यासपीठ से बताया कि सुदामा दरिद्र नहीं है, सुदामा संतोषी है। सुदामा सम्यक प्रकार से धनी है। जिसके पास राम नाम धन भक्ति हो वो दरिद्र हो ही नहीं सकता। मंगलवार को शंकर लाल ,कैलाश चंद त्रिलोक बालकिशन की तरफ से तुलसी शालिग्राम विवाह का आयोजन किया जाएगा ।
कथा के दौरान महिलाओं ने भजनों पर नृतय भी किया। भागवत कथा को सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु भी यहां पहुंच रहे है।

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