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खुले आसमान तले पढऩे को मजबूर हुए भैंसखेड़ा विद्यालय के बच्चे

फोलाई पंचायत के भैंसखेड़ा गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन जमींदोज होने के बाद गुरुवार को खुले में बच्चों को बैठना पड़ा। कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई खुले आकाश तले संचालित हो रही है। इसी बीच गुरुवार को शिक्षा एवं तकनीकी अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर शैक्षिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।

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खुले आसमान तले पढऩे को मजबूर हुए भैंसखेड़ा विद्यालय के बच्चे

गेण्डोली. भैंसखेड़ा विद्यालय के बच्चे खुले में पढ़ाई करते हुए।

गेण्डोली. फोलाई पंचायत के भैंसखेड़ा गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन जमींदोज होने के बाद गुरुवार को खुले में बच्चों को बैठना पड़ा। कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई खुले आकाश तले संचालित हो रही है। इसी बीच गुरुवार को शिक्षा एवं तकनीकी अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर शैक्षिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।

केशवरायपाटन ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी मधु वर्मा, अतिरिक्त मुख्य शिक्षा अधिकारी बृजसुंदर नामा, पंचायत शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार मीणा, तकनीकी अधिकारी कैलाश धाकड़ एवं सुरेश मीणा भैंसखेड़ा पहुंचे। अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक कौशल किशोर मीणा से विद्यालय की अस्थाई व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों के शैक्षणिक वातावरण, पोषाहार एवं अन्य सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि विद्यालय की सभी कक्षाएं खुले मैदान में लगाई जा रही हैं, जबकि पास के एक निजी मकान के एक कमरे में विद्यालय का सामान रखा गया है तथा बरामदे में पोषाहार तैयार किया जा रहा है।

ग्रामीणों व विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष धनराज मीणा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति सदस्यों एवं अभिभावकों ने तात्कालिक शैक्षणिक व्यवस्था के लिए मरम्मत मद में स्वीकृत दो लाख रुपए की राशि से विद्यालय परिसर में टीनशैड निर्माण करवाने का सुझाव दिया।

मौके पर मौजूद तकनीकी अधिकारियों ने इस संबंध में स्टीमेट तैयार कर उच्चाधिकारियों को स्वीकृति के लिए भिजवाने का आश्वासन दिया। वहीं ग्रामीणों एवं समिति सदस्यों ने विद्यालय भवन का शीघ्र निर्माण कराने की मांग उठाई। इस पर तकनीकी अधिकारियों ने स्थायी भवन निर्माण के लिए विद्यालय परिसर का पट्टा तैयार करवाने का सुझाव दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि उन्हें खुले आसमान के नीचे पढऩे को मजबूर न होना पड़े।