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नए शिक्षा सत्र में बच्चों के प्रवेश की उम्र बढ़ाने को लेकर असमंजस

नए शिक्षा सत्र में प्रारंभिक शिक्षा में प्रवेश को लेकर उम्र की बाध्यता के चलते असमंजस बना हुआ।हाल ही में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से राजकीय एवं निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में बालकों की प्रवेश की आयु 6 व 7 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने आदेश भी जारी किया है।

बूंदीJun 15, 2024 / 11:23 am

Narendra Agarwal

नए शिक्षा सत्र में बच्चों के प्रवेश की उम्र बढ़ाने को लेकर असमंजस

प्रारंभिक शिक्षा

बूंदी.नए शिक्षा सत्र में प्रारंभिक शिक्षा में प्रवेश को लेकर उम्र की बाध्यता के चलते असमंजस बना हुआ।हाल ही में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से राजकीय एवं निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में बालकों की प्रवेश की आयु 6 व 7 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने आदेश भी जारी किया है।
इधर,शिक्षा विभाग के इस आदेश से शिक्षक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों का कहना है कि इस आदेश से सरकारी स्कूलों में नामांकन तो गिरेगा साथ ही शिक्षकों के कई पद समाप्त हो जाएंगे। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के आदेश की मांग को लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार से सरकारी स्कूलों की बेहतरी के लिए पूर्व की भांति पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 5 वर्ष की आयु रखने की मांग की है।
शिक्षक संघ रेस्टा और राजस्थान शिक्षक राष्ट्रीय ने उक्त आदेश को सरकारी विद्यालयों के लिए गलत बताया है। नवीन शिक्षण सत्र में राजकीय विद्यालय में प्रवेश आयु 6 वर्ष किए जाने के बाद से सरकारी विद्यालयों में नामांकन के दौरान बालक बालिकाओं का टोटा और अधिक बढ़ जाएगा।
पूर्व की भांति हो आयु 5 वर्ष की मांग
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी पत्र में यह आदेश है कि आरटीई दिशा-निर्देश 2024-25 के अनुसार राजकीय व गैर सरकारी विद्यालयों में कक्षा-1 में होने वाले प्रवेश को लेकर 6-7 वर्ष आयु वर्ग के बालक ही पात्र होंगे। सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में कक्षा-1 में होने वाले प्रवेश इसी प्रक्रिया के अनुसार होंगे। कुल मिलाकर आयु के संबंध में शिक्षा विभाग एकरूपता लाना चाहता है। वहीं सरकर के इस आदेश को लेकर शिक्षक संगठनों का मानना है कि सरकार को पूर्व की भांति पहली कक्षा में 5 साल के बच्चों को प्रवेश दिलवाने की आयु रखनी चाहिए।
ऐसे तो नामांकन में आएगी गिरावट
विभाग के आयु संबंधी नवीन आदेश से प्राइवेट स्कूलों को जहां बढ़ावा मिलेगा तो वहीं सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव अभियान के माध्यम से 10 फीसदी नामांकन बढ़ोतरी के लक्ष्य पूर्ति की बात तो दूर हजारों की संख्या में नामांकन में गिरावट आएगी।
कक्षा-1 में प्रवेश कम होंगे
कक्षा 1 में प्रवेश हेतु न्यूनतम आयु 6 वर्ष की बाध्यता के चलते इस सत्र में पहली कक्षा में नामांकन कम होंगे। जिसके कारण सरकारी विद्यालयों की बजाय निजी स्कूलों के नामांकन में वृद्धि होगी।
बसंत कुमार ज्याणी,प्रदेश प्रवक्ता,राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के द्वारा हाल ही कक्षा एक में प्रवेश के लिए छात्रों की की आयु 6 से 7 वर्ष की आयु के संबंध में जारी किए आदेश उचित नहीं है।जबकि प्रदेश में निजी विद्यालयों में पूर्व प्राथमिक कक्षाएं संचालित है। जिनमे लगभग ढाई से तीन वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को प्रवेश दे दिया जाता है।
अनिल सामरिया, जिलाध्यक्ष,राजस्थान शिक्षक राष्ट्रीय,बूंदी
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 3 वर्ष प्री प्राइमरी शिक्षा का प्रावधान करके 6 वर्ष की उम्र में कक्षा एक में प्रवेश का प्रावधान किया गया हैं।
राजेंद्र कुमार व्यास, जिला शिक्षा अधिकारी,बूंदी

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