
नैनवां. सरकारी कॉलेज खोलने को लेकर सरकार भी भेदभाव कर रही है। प्रदेश में जहां पर संसाधन, भूमि व भवन नहीं है, वहां पर कॉलेजों की स्वीकृति दी जा रही है। वहीं बूंदी जिले के नैनवां में कॉलेज को सरकारी मान्यता देने को लेकर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।
जबकि यहां चल रहा कॉलेज सरकारी दर्जा प्राप्त करने के सभी मापदण्डों को पूरा कर रहा है। फिर भी सरकार जानबूझकर कॉलेज को सरकारी का दर्जा नहीं देना चाह रही है। नैनवां के महाविद्यालय में सभी सुविधायुक्त भवन वर्तमान में उपलब्ध है।
अध्ययन के लिए करीब पंद्रह सौ विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। भौतिक सुविधा व शिक्षण सामग्री पर कुछ खर्च करने की जरूरत नहीं है। महाविद्यालय के नाम करीब 75 बीघा भूमि आरक्षित है। पांच बीघा परिसर में बने भवन में 12 कक्षा कक्षों का निर्माण हो रहा है।
प्रयोगशाला व पुस्तकालय भवन भी है। पांच कमरों व दो स्टोर का प्रशासनिक ब्लॉक बना हुआ है। छात्रसंघ परिषद का अलग कार्यालय व खेल मैदान है। पेयजल के लिए उच्च जलाशय का निर्माण हो रहा है। इसके बावजूद वर्तमान कॉलेज को सरकारी की मान्यता देने में सरकार को दिक्कत हो रही है। जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों व छात्र वर्ग में काफी रोष है।
सरकारी राशि से ही बन रहा है भवन
नैनवां के वर्तमान कॉलेज में सरकारी राशि से ही भवन का निर्माण हो रहा है। भवन निर्माण पर अब तक 92 लाख रुपए का सरकारी धन खर्च हो चुका है। इसमें से 48 लाख 50 हजार रुपए विधायक कोष, तीस लाख रुपए सांसद कोष व अकाल राहत मद से व 13 लाख 6 0 हजार रुपए दानदाताओं की ओर से दिए गए हैं।
हां कर रहा है मापदण्ड पूरे
कॉलेज को सरकारी करने के लिए तथ्यात्मक व सकारात्मक रिपोर्ट 21 जून को अतिरिक्त मुख्य सचिव उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा को भेज दिया था। इसके साथ ही यह भी बता दिया था कि कॉलेज सरकारी मान्यता के सभी मापदण्ड पूरे कर रहा है।
पंकज गुप्ता, प्राचार्य बीएजेएम महाविद्यालय नैनवां
Published on:
28 Jun 2018 08:03 pm

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