
बूंदी. इको-सेंसिटिव जोन के लिए आयोजित बैठक में चर्चा करते जिला कलक्टर व अन्य अधिकारी।
बूंदी. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व से सटे बूंदी शहर और केशवरायपाटन नगरपालिका क्षेत्र के निवासियों के लिए राहत की खबर है। इन दोनों शहरी क्षेत्रों के विकास को देखते हुए इन्हें टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के दायरे से बाहर रखने का फैसला लिया गया है। अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों पर ईएसजेड के प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
यह निर्णय जिला कलक्टर अक्षय गोदारा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में लिया गया है। बैठक में टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन की प्रारूप अधिसूचना पर मिली आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया गया। समिति ने कुल 12 आपत्तियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक में जिला कलक्टर गोदारा ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में बची हुई वन भूमि का इंद्राज जल्द पूरा किया जाए।
वन अधिनियम, 1980 लागू होने के बाद गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित वन भूमि को चिन्हित करें। जिलों में स्थित ओरण, देव वन जैसी भूमियों और आर्द्रभूमियों (वेटलेंड) का सीमांकन प्राथमिकता से किया जाए।
उप वन संरक्षक देवेन्द्र सिंह भाटी ने समिति को इको-सेंसिटिव जोन में प्रतिबंधित, विनियमित और स्वीकृत गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। चर्चा के बाद समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि बूंदी और केशवरायपाटन के सुनियोजित विकास के लिए इन दोनों शहरों की सीमा में ईएसजेड का विस्तार शून्य रखा जाना सही है। हालांकि, अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में जोन का विस्तार एक किलोमीटर या उससे अधिक रहेगा। इस अवसर पर नगरपरिषद सभापति सरोज अग्रवाल, तालेड़ा प्रधान राजेश रायपुरिया, केशवरायपाटन प्रधान वीरेन्द्र सिंह हाडा और संबंधित उपखंड अधिकारी भी मौजूद रहे।
Published on:
11 Sept 2025 05:46 pm
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