बूंदी. किसानों को बुवाई के लिए अब साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जी हा! किसानों की परेशानी को देखते हुए कृषि विभाग ने नई पहल शुरू की है, जिसके चलते रबी सीजन में इस बार बीज की गुणवत्ता ओर महंगे दामों को लेकर किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। कृषि आयुक्त ने इसको लेकर आदेश जारी किए हैं। वहीं जिलेवार लक्ष्य भी आवंटित किए हैं।
किसानों को हर बार होने वाली परेशानी को देखते हुए कृषि विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन दलहन योजना के तहत अनुदानित बीज बांटने की योजना शुरूकी है। जिसके तहत बूंदी को चना बीज के 2 हजार क्विंटल लक्ष्य आवंटित हुए। अनुदानित बीज जिले में अधीकृत फर्म पर ही मिलेगा। इसके लिए कृषि विभाग ने जिला मुख्यालयों पर बीज को वितरण करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि रबी सीजन में करीब 40 हजार हेक्टेयर में चने की बुवाई होगी।
कई बार विवाद की स्थिति, लेनी होगी अनुशंषा
कृषि अधिकारियों की माने तो देखने में आया है कि बीज लेने को लेकर हर बार किसानों को दो-दो हाथ करने पड़ते हैं। यही नही अनुदान पर वितरित होने वाले मिनीकिट और उर्वरकों के मामले में कृषि विभाग को किसानों के रोष का सामना करना पड़ता है। कई बार तो वितरण केंद्र पर विवाद की स्थिति बन जाती है। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए कृषि विभाग ने नई पहल शुरू की है। जिसमें किसान को अनुदान पर बीज लेने के लिए संबंधित कृषि पर्यवेक्षक की अनुशंषा लेनी होगी। साथ ही किसानों को अनुदान देने के दौरान खुद का आधार कार्ड व जमाबंदी भी देना होगा।
किसान होंगे लाभान्वित
कृषि विभाग ने अनुदान पर बांटे जाने वाले बीज की दर बाजार भाव के अनुसार तय की है। किसानों को नई किस्म के साथ पुरानी किस्मों के बीज मिल सकेंगे।इसका ध्यान रखा गया है। कृषि अधिकारी प्रकाश सिंह यादव के अनुसार अधिकतम अनुदानित बीज दो हेक्टेयर तक किया जाएगा। विभाग के अनुसार चना का बीज 35 रुपए प्रति किलो दिया जाएगा। इस योजना से कई किसान लाभान्वित होंगे।
नहीं होती गुणवत्ता की गारंटी
आमतौर में देखने में आया है कि किसान ब्याज के चलते साहूकार के चक्कर में आकर मंहगे दामों में बीज लेने पर मजबूर हो जाते हंै। लेकिन इसमें भी गुणवत्ता की कोई गांरटी नहीं होती। इसको देखते हुए अब काश्तकारों को गुणवत्ता युक्त और कमदाम पर बीज आसानी से मिल सकेगा।
भरना होगा पत्र
कृषि विस्तार के उपनिदेशक रामनिवास पालीवाल ने बताया कि ‘चने का बीज अनुदानित दर पर दिया जाएगा। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए। यह कृषि पर्यवेक्षक की सिफारिश पर दिया जाएगा। इसके लिए किसान को एक पत्र भरना होगा।’